भास्कर न्यूज । नागौर नागौर में आयोजित शिव चरित्र कथा एवं शिव-पार्वती विवाहोत्सव के तीसरे दिन श्रद्धा और भक्ति का अनूठा संगम देखने को मिला। श्रीराम सेवा आश्रम, वृंदावन के संत लक्ष्मण दास महाराज ने प्रवचन में कहा कि भारतीय संस्कृति हमें सदाचार और सत्संग का मार्ग दिखाती है। यदि किसी चीज से बचना है तो वह है कुसंग, क्योंकि मनुष्य की संगति ही उसकी कीमत निर्धारित करती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति दूसरों के दोष देखकर प्रसन्न होता है, उसे न तो सच्ची विद्या प्राप्त हो सकती है और न ही ज्ञान। महाराज ने कहा कि 20 वर्ष की आयु में व्यक्ति 50 वर्षों की पढ़ाई कर सकता है, लेकिन 50 वर्ष का अनुभव 20 वर्ष की उम्र में प्राप्त नहीं किया जा सकता। अनुभव समय और धैर्य के साथ ही मिलता है। तीसरे दिन का मुख्य प्रसंग माता सती की तपस्या पर केंद्रित रहा। भजनों के मधुर गायन के साथ मां की कठोर तपस्या का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा बल तपस्या है और अपने तेज का विस्तार करने के लिए तप आवश्यक है। मां पार्वती की दृढ़ तपस्या से ही उन्हें भगवान शिव की प्राप्ति हुई। आयोजन मंडल के अशोक कल्ला ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिदिन की भांति गणेश पूजन, षोडश मातृका पूजन और नवग्रह पूजन से हुई। पंडित बलभद्र के सानिध्य में यजमानों ने विधिविधान से पूजा-अर्चना की। दोपहर दो से पांच बजे तक कथा के पश्चात सत्संग, आरती और प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। नागौर. कथा कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।


