प्रदेश में पर्यटन विकास के नाम पर 5 वर्षों में 97 करोड़ रुपए खर्च हुए, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती। 2021 से 2025 के बीच 23 पर्यटन स्थलों के लिए जारी इस राशि में से करीब 46.51 करोड़ सिर्फ दो स्थानों- चंदखुरी और शिवरीनारायण पर खर्च किए गए। दोनों स्थल राम-वनगमन पर्यटन परिपथ योजना में शामिल हैं। बावजूद इसके, यहां बुनियादी सुविधाएं अधूरी हैं और विकास कार्य कागजों तक सीमित नजर आते हैं। राजनीतिक स्तर पर भी खर्च का अंतर सामने आया है। कांग्रेस सरकार ने 2021 से 2023 के बीच चंदखुरी में 26.39 करोड़ और शिवरीनारायण में 13.29 करोड़ रुपए खर्च किए। भाजपा सरकार ने 2024 और 2025 में चंदखुरी पर 5.5 करोड़ और शिवरीनारायण पर 1.33 करोड़ रुपए खर्च किए। कुल मिलाकर दोनों स्थलों पर लगभग 47 करोड़ रुपए खर्च हुए, पर सुविधाएं नहीं हैं। अन्य धार्मिक, प्राकृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों पर विकास कार्य या तो अधूरे हैं या शुरू नहीं हो सके। इन स्थलों के लिए जारी हुई थी रकम: 23 स्थलों में चंद्रखुरी, शिवरीनारायण, दामाखेड़ा,रकसगंडा, बिलासपुर, मुकुंदपुर नगरी सिहावा, सीतामढ़ी हरचौका, तुरतुरिया, राजिम, सतरेंगा कोरबा, बगीचा, डोंगरगढ़, बिलासपुर, सेतगंगा, बालोद, श्रृंगी ऋषि सिहावा, चंपारण, रामगढ़, बारनावापारा, चित्रकोट, टाटामारी केशकाल, सरोधादादर कबीरधाम, कांगेर वैली नेशनल पार्क। घाट अधूरे, प्रतिमा बदहाल और सुविधाएं नदारद अधूरा स्वागत… शिवरीनारायण का स्वागत द्वार, जो चार साल बाद भी पूरा नहीं बन सका। शिवरीनारायण में कुल 3 स्वागत द्वार बनने थे। इनमें से दो पूर्ण हैं, लेकिन ये तीसरा लंबे समय से इसी हालत में है। अधूरे द्वार से आवाजाही के दौरान खतरा रहता है। चंदखुरी: 32 करोड़ खर्च, पर बदहाल माता कौशल्या की भूमि के रूप में पहचान रखने वाले चंदखुरी में पांच वर्षों में लगभग 32 करोड़ रुपए खर्च किए गए। भास्कर टीम जब 10 फरवरी को कौशल्या माता मंदिर परिसर पहुंची तो प्रवेश द्वार पर लगी भगवान श्रीराम की ऊंची प्रतिमा की स्थिति चौंकाने वाली थी। प्रतिमा जगह-जगह से बदरंग दिखी और उस पर दरारें भी नजर आईं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि जल्द ही नई प्रतिमा स्थापित की जाएगी, लेकिन तब तक पुरानी प्रतिमा की अनदेखी समझ से परे है। परिसर में पर्यटकों की संख्या बेहद कम दिखी। सुविधा के नाम पर केवल लाइट एंड साउंड शो है, जो सप्ताह में सिर्फ शनिवार और रविवार को आयोजित होता है। शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं। कुछ स्थानों पर पेवर ब्लॉक लगाए गए हैं, लेकिन तालाब की सफाई लंबे समय से नहीं हुई प्रतीत होती। इतने बड़े बजट के बावजूद समग्र विकास का अभाव साफ दिखाई देता है। शिवरीनारायण: अधूरे घाट,अधूरा वादा
शबरी की भूमि के रूप में प्रसिद्ध शिवरीनारायण में पांच साल में लगभग 14.5 करोड़ रुपए खर्च किए गए। जमीनी निरीक्षण में यहां भी विकास अधूरा मिला। घाटों का निर्माण पूरा नहीं हुआ है। सीढ़ियां असमान हैं, फिनिशिंग का अभाव है और कई जगह सुरक्षा रेलिंग तक नहीं लगाई गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्तमान संरचना में सुरक्षित स्नान करना भी जोखिम भरा है। पर्यटकों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। मंडप के नाम पर छह ढांचे बने, जिनमें से दो अधूरे हैं और शेष प्रस्तावित ही रह गए। परिसर की लाइटिंग व्यवस्था कमजोर है, जिससे शाम के समय निजी इंतजाम करने पड़ते हैं। यहां स्थापित मूर्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अधूरे कामों के लिए बजट में प्रबंध कर रहे चंद्रखुरी और शिवरीनारायण में कुछ काम अधूरे रह गए हैं। इसके लिए बजट में राशि का प्रबंध कर काम को पूरा कराया जाएगा। पर्यटन स्थलों पर सुविधाएं का विकास करना हमारी प्राथमिकता है।’ -राजेश अग्रवाल, मंत्री, पर्यटन विभाग।


