टोंक जिला मुख्यालय सहित पूरे जिले में रविवार को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जा रहा है। पर्व को लेकर शिव मंदिरों में विशेष सजावट की गई है। लोगों की शिवालयों में आवाजाही बढ़ गई है ज्योतिषियों के अनुसार रविवार शाम 5.05 बजे चतुर्दशी तिथि शुरू होगी और उसी दिन महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। नक्षत्र और तिथि के संयोग को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखा जा रहा है। शिव मंदिरों में सजावट और व्यवस्थाएं शुरू
महाशिवरात्रि को लेकर जिलेभर के शिव मंदिरों से जुड़े व्यवस्थापक सजावट और साफ-सफाई में जुटे हैं। मंदिर परिसरों को आकर्षक रूप देने के साथ दर्शन और पूजा की व्यवस्थाएं की जा रही हैं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। जिला मुख्यालय स्थित मंशाप्रूर्ण महादेव मंदिर में भी महाशिवरात्रि पर्व को लेकर तैयारियां शुरू कर दी है। साज सजावट की जा रही है। समाज सेवी सुनील बंसल ने बताया कि महाशिवरात्रि को लेकर जिलेभर में लोगों में उत्साह बना हुआ हैं। लोग शिवालयों में पहुंच रहे है । चतुर्दशी तिथि और नक्षत्र का संयोग
मनु ज्योतिष एवं वास्तु शोध संस्थान टोंक के निदेशक बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि रविवार शाम 5.05 बजे चतुर्दशी तिथि का शुभारंभ होगा। उसी दिन महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाएगा। उतराषाढा नक्षत्र रात 7.48 बजे तक रहेगा। महाशिवरात्रि पर दीपक जलाने का महत्व
बाबूलाल शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि की रात किसी शिव मंदिर में दीपक जलाना शुभ माना गया है। शिव पुराण के अनुसार कुबेर देव ने पूर्व जन्म में रात के समय शिवलिंग के पास रोशनी की थी, जिसके कारण अगले जन्म में उन्हें देवताओं का कोषाध्यक्ष बनाया गया। घर में पारद शिवलिंग स्थापना का उपाय
महाशिवरात्रि पर छोटा पारद शिवलिंग लाकर घर के मंदिर में स्थापित करने की परंपरा भी बताई गई है। शिवरात्रि से इसकी नियमित पूजा करने से घर की दरिद्रता दूर होती है और लक्ष्मी कृपा बनी रहती है। स्फटिक शिवलिंग और मंत्र जप
उन्होंने बताया कि महाशिवरात्रि पर स्फटिक शिवलिंग की पूजा भी की जा सकती है। जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक कर ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जप करने का महत्व बताया गया है। हनुमान चालीसा और दान का महत्व
बाबूलाल शास्त्री के अनुसार हनुमानजी को भगवान शिव का अंशावतार माना गया है। महाशिवरात्रि पर हनुमान चालीसा का पाठ करने से शिव और हनुमान दोनों की कृपा मिलती है। इसके अलावा किसी सुहागिन को सुहाग का सामान देना, जरूरतमंद को अनाज और धन का दान करना भी शुभ बताया गया है। बिल्व वृक्ष के नीचे खीर और घी का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति मानी गई है।


