जलदाय विभाग की बड़ी लापरवाही ने भरतपुर और डीग जिले की करीब 28 लाख आबादी को पानी के लिए तरसा दिया है। चंबल पाइपलाइन टूटने के बाद पिछले पांच दिनों से दोनों जिलों में हाहाकार मचा हुआ है। शहर की दर्जनों कॉलोनियों में नल सूखे पड़े हैं और लोग पड़ोसियों के बोर से पानी ढोने को मजबूर हैं। नहाने] कपड़े धोने से लेकर खाना बनाने और पूजा-अर्चना तक संकट खड़ा हो गया है। हालात का फायदा उठाकर टैंकर माफिया और आरओ प्लांट संचालकों ने दाम दोगुने कर दिए हैं। विभाग के इंजीनियर खुद मान रहे हैं कि नई पाइपलाइन डालते समय पुरानी लाइन की अनदेखी भारी पड़ गई। मरम्मत जारी है, लेकिन शहर में अभी दो दिन और पानी आने की उम्मीद नहीं है। भास्कर टीम शुक्रवार को भरतपुर से 55 किमी दूर रूपवास के पास संरेंधी पहुंची। यहां मुख्य सड़क किनारे जेसीबी और भारी मशीनों से पाइपलाइन की मरम्मत चल रही थी। इंजीनियरों की टीम मौके पर जुटी थी। विभागीय इंजीनियरों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि धौलपुर-भरतपुर नई चंबल पाइपलाइन की खुदाई के दौरान पुरानी लाइन के बेहद पास गड्ढा खोद दिया गया। इससे पुरानी लाइन को थामे मिट्टी खिसक गई और जोड़ खुलते ही पाइप फट गया। पाइप में मौजूद 10-15 एमएलडी पानी खेतों में बह गया, जिससे फसलें भी खराब हुईं। पहले स्थानीय स्तर पर मरम्मत की कोशिश हुई, लेकिन संसाधन कम पड़ने पर केकड़ी से टीम बुलानी पड़ी। नई लाइन के करीब 20 मीटर पाइप काटकर पुरानी लाइन में जोड़ लगाए गए हैं। अफसरों का कहना है कि जल्दबाजी में पानी छोड़ा गया तो फिर लीकेज का खतरा रहेगा। वहीं परियोजना से जुड़े अधिकारी जवाब देने से बचते नजर आए। 25 से ज्यादा कॉलोनियों में पानी की किल्लत शहर के गणेश नगर, सुभाष नगर, कैलाशपुरी, गांधी नगर, अलादीन कॉलोनी, कुम्हेर गेट क्षेत्र, प्रताप कॉलोनी, नमक कटरा, राधानगर, अग्रसेन नगर, गिरीश विहार, रोज विला, राजेंद्र नगर, पदम विहार, गोविंद नगर, हाउसिंग बोर्ड, कृष्णा नगर, बी-नारायण गेट, एकता विहार, दही वाली गली, खेरापति मोहल्ला, कोतवाली क्षेत्र, राजीव कॉलोनी, कंपनी बाग और गुलाल कुंड सहित कई इलाकों में सप्लाई ठप है। लोग अफसरों से लेकर जनप्रतिनिधियों तक शिकायत कर रहे हैं। किल्लत में रात 12 बजे तक खुल रहे आरओ प्लांट
पानी की किल्लत से भरतपुर और डीग में आरओ प्लांट संचालकों की बिक्री अचानक दोगुनी हो गई है। एक प्लांट संचालक ने बताया कि सामान्य दिनों में 250-300 कैंपर सप्लाई होते थे, जो अब दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। जिन घरों में पहले 1-2 कैंपर जाते थे, वहां अब 5-7 कैंपर भेजने पड़ रहे हैं। बढ़ती मांग के कारण दुकानें रात 12 बजे तक खुल रही हैं और सुबह 3 बजे फिर शुरू करनी पड़ रही हैं। अनुमान है कि दोनों जिलों में 300-400 आरओ प्लांट संचालित हैं। सवालों का जवाब ही नहीं दे सके एक्सईएन बसवाल {सवाल: सरेंधी के पास नई लाइन खुदाई का कोई गड्ढा नहीं है, फिर लाइन कैसे टूटी।
जवाब: पता नहीं
{सवाल: आखिर क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को सही करने में पांच दिन क्यों लगे।
जवाब: ऑफिस आकर बात करना।
{सवाल: परियोजना में कितने अफसर कार्यरत है।
जवाब: ऑफिस में आ जाना। टैंकर के दाम 700 से बढ़कर 1200 रुपए तक टैंकर संचालकों ने एक साथ दाम लगभग दोगुने कर दिए हैं। पहले जो टैंकर 500-700 रुपए में मिलता था, अब उसके 1200 रुपए तक वसूले जा रहे हैं। बड़े संचालक के मुताबिक पहले रोज 25-30 टैंकर चलते थे, अब संख्या 100 से पार पहुंच गई है। बुधवार को 70, गुरुवार को 98 और शुक्रवार को 114 टैंकर सप्लाई किए गए। उनका दावा है कि पानी ट्यूबवेल का मीठा और पीने योग्य है।


