यूजी-पीजी के 1.25 लाख विद्यार्थियों को नुकसान:एनईपी के सिस्टम में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय फेल, सेमेस्टर परीक्षा-परिणाम डेढ़ साल तक लेट

मेवाड़ में उच्च शिक्षा के केंद्र मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) की शैक्षणिक अव्यवस्थाएं अब केवल प्रशासनिक समस्या नहीं रहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बनती जा रही हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुसार तीन वर्षीय स्नातक और दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम समयबद्ध तरीके से पूरे किए जाने चाहिए। लेकिन सुविवि में यही पाठ्यक्रम एक से डेढ़ साल की देरी से पूरे हो पा रहे हैं। दैनिक भास्कर ने पड़ताल की। सामने आया कि सेमेस्टर सिस्टम लागू होने के बाद परीक्षाएं समय पर नहीं हो रही हैं, और न ही परिणाम समय पर घोषित किए जा रहे हैं। मसलन- तीन साल की स्नातक डिग्री चार साल में और दो साल की पोस्टग्रेजुएट डिग्री ढाई साल में पूरी हो रही है। अभी सुविवि प्रशासन ने यूजी के 5वें सेमेस्टर और पीजी के किसी भी सेमेस्टर का परीक्षा कार्यक्रम जारी नहीं किया है। मार्च-अप्रैल में नगर निकाय और पंचायतीराज चुनाव के कारण परीक्षाओं का आयोजन चुनौतीपूर्ण रहेगा। स्थिति ये है कि पाठ्यक्रम पूरे नहीं हो पा रहे हैं। परीक्षाएं समय पर नहीं होने से परिणाम भी घोषित नहीं हो रहे। कुल मिलाकर सीधा असर छात्रों के भविष्य, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और आगे की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बड़ा नुकसान : पिछड़ रहे विद्यार्थी, कॅरिअर प्लान अस्त-व्यस्त
-सुविवि में प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।
-वर्ष 2023 में स्नातक प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश लेने वाले छात्रों की पंचम सेमेस्टर की परीक्षा तिथियां अब तक घोषित नहीं हुई हैं। एनईपी-2020 के अनुसार इनकी डिग्री मई-2026 तक पूरी हो जानी चाहिए। राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्र वर्ष 2026 में प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठ सकेंगे, जबकि सुविवि के छात्र 2027 तक पात्र नहीं होंगे। पीजी छात्रों की परीक्षाएं 7-8 महीने की देरी से चल रही हैं। एमबीए, कैट, मैट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र 2026 में पात्र नहीं बन पाएंगे, जिससे करियर प्लान अस्त-व्यस्त हो गया है। वसूली पूरी, हर छात्र पर यूजी में 18 हजार, पीजी में 12 हजार का ज्यादा बोझ
-सेमेस्टर सिस्टम लागू होने से हर छात्र यूजी में औसतन 18 हजार और पीजी में 12 हजार रुपए अधिक खर्च कर रहा है।
-वार्षिक परीक्षा पद्धति के दौरान शुल्क वर्ष में एक बार लिया जाता था, अब दो-दो बार वसूला जा रहा है।
-सभी संघटक और संबद्ध कॉलेजों में 1.50 लाख विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनमें 1.25 लाख यूजी और पीजी में पढ़ रहे हैं।
-औसत परीक्षा शुल्क 15 हजार प्रति विद्यार्थी होने के कारण सालाना 187.50 करोड़ अतिरिक्त वसूली हो रही है।
राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों से तुलना
…..
न आरयू से सबक, न जीजीटीयू से, इनमें सबकुछ समय पर
-राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर ने एनईपी-2020 के अनुसार अपना अकादमिक कैलेंडर समय पर जारी किया है। यहां परीक्षाएं दिसंबर-जनवरी में पूरी कर ली गईं।
-गुरु गोविंद जनजातीय विश्वविद्यालय, बांसवाड़ा भी स्टाफ की कमी के बावजूद सत्र और परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार संचालित हो रहा है।
-अधिकांश विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं दो-तीन पारियों में आयोजित कर एक-डेढ़ महीने में पूरी कर ली जाती हैं, जिससे शेष समय शिक्षण के लिए मिलता है।
यहां ये : सुविवि में प्रत्येक सेमेस्टर की परीक्षाएं 5-6 महीने तक चलती हैं, परिणामस्वरूप शिक्षण केवल एक माह के लिए बचता है।
………
सिस्टम को समय पर लाएंगे
“सेमेस्टर सिस्टम को समय पर लाएंगे। इसके लिए रणनीति के साथ तैयारियों में जुटे हैं। विद्यार्थियों को किसी तरह का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। मैं हाल ही परीक्षा नियंत्रक बना हूं।”
-मुकेश बारबर, परीक्षा नियंत्रक, सुविवि

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *