रणथंभौर फोर्ट को यूनेस्को ने विश्व धरोहर घोषित किया हुआ है। इसके सार-संभाल की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग के पास है, लेकिन पुरातत्व विभाग की अनदेखी के चलते इस किले की सारसंभाल नहीं हो रही है। किले में रणथंभौर टाइगर रिजर्व की कई प्रजातियों के पक्षी और वन्य जीव भी आश्रय पाते हैं। इन वन्यजीवों को अब ध्वनि प्रदूषण नुकसान पहुंचा रहा है। दशकों पुराना पंप सेट करता है तेज आवाज दरअसल, रणथंभौर किले के पदला तालाब में पुरातत्व विभाग की ओर से एक पंप सेट लगा रखा है। यह पंप सेट हमीर महल के पास बनाए गए पार्क को सिंचाई के लिए पानी देता है। यह इंजन सेट दशकों को पुराना है। पुराना होने के चलते इंजन सेट बहुत ज्यादा आवाज करता है। इस इंजन की गड़गड़ाहट की आवाज से यहां से गुजरने वाले पर्यटक परेशान हो जाते हैं। वहीं किले में रहने वाले पक्षी व वन्यजीव के स्वछंद विचरण नहीं कर पर पाते हैं। वहीं पूरे मामले में पुरातत्व विभाग की लापरवाही के चलते यहां पर ध्वनि प्रदूषण हो रहा है। मामले में लोगों की ओर से पुरातत्व विभाग के अधिकारियों को कई बार जानकारी दी गई, लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। यह बोले, जिम्मेदार अधिकारी मामले को लेकर पुरातत्व विभाग के ऑर्कोलॉजिकल सुपरीटेंडेंट अमित बैरवा का कहना है कि उनका तबादला सितंबर माह में हुआ था। यह इंजन पहले से ही लगा हुआ है अगर ऐसी कोई शिकायत है तो मामले को दिखाकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।


