एकलिंगनाथ के जयकारों से गूंजी कैलाशपुरी:अलसुबह महाकालेश्वर मंदिर में आरती का दिखा उत्साह, नाचते-गाते पहुंच रहे पैदल युवा

उदयपुर में महाशिवरात्रि के मौके पर हर तरफ ​शिव की गूंज है। हर-हर महादेव के साथ कदम आगे बढ़ाते हुए शिव के दर्शन के बाद भक्त भगवान की भक्ति में डूब गए। रास्तों में कतारे लगी है। भोलेनाथ की अराधना के लिए भक्त डीजे की धुनों पर नाचते-गाते पहुंच रहे हैं। शिवालयों में मंदिरों में विशेष तैयारियां की गई हैं। उदयपुर के महाकाल मंदिर में भी महाकाल के दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। उदयपुर-नाथद्वारा रूट पर कैलाशपुरी में भगवान एकलिंगनाथ के दर्शन के लिए मंदिर के मुख्य गेट से 500 मीटर से ज्यादा लंबी कतारें लगी है। वही, शहर के गुप्तेश्वर महादेव और झामेश्वर महादेव मंदिर में भी लोग दर्शनों के लिए पहुंच रहे है। कई जगहों पर भजन मंडली द्वारा पूरी रात्रि भजनों से माहौल को भक्तिमय बनाए रखा। महाशिवरात्रि पर उदयपुर से करीब 20 किलोमीटर दूर कैलाशपुरी स्थित​ एकलिंगजी मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का रात से पहुंचना शुरू हो गया और सबमें सबसे पहले सुबह पट खुलते ही दर्शन की होड थी। यहां उदयपुर और आसपास के गांवों से भक्त पैदल ही एकलिंगजी जाते है। रास्ते में उनके स्वागत और भंडारे के भी जगह-जगह प्रबंध किए गए है। एकलिंगजी में दर्शन के लिए उदयपुर, राजसमंद जिले के अलावा कई शहरों और गांवों से शिव भक्त पहुंचते है। मंदिर के वहां तक वाहनों का प्रवेश बंद कर रखा है और पूरे रास्ते में ही बहुत पहले वाहनों को रोक दिया गया है क्योंकि यहां पर पैदल आने-जाने वालों की भीड़ रहती है। इस शिव मंदिर में सबसे ज्यादा श्रद्धालु पहुंचते है। देर रात से श्रद्धालुओं का एकलिंग नाथ मंदिर पहुंचने के साथ ही यहां पर एकलिंगनाथ जी की जयकारों से आसमां गूंजा दिया गया। उदयपुर के रानी रोड पर महाकाल मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों का पहुंचना शुरू हो गया और यहां भी मंदिर के मुख्य गेट से अंदर तक भक्तों की कतारें लगी हुई है। शहर के धूलकोट महासतीया स्थित श्री महावीर हनुमान मंदिर में महाशिवरात्रि के मौकर पर पवनपुत्र हनुमान का भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार के रूप में मनमोहक श्रृंगार किया गया। मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ भगवान को शिव प्रतीकों जैसे त्रिशूल और विशेष लेपन से सजाया गया, जिसे देखने के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजन समिति के महामंत्री सी. पी. बंसल ने बताया कि हनुमान जी वास्तव में भगवान शिव के ही अंश हैं, जिन्होंने त्रेतायुग में प्रभु श्रीराम की सेवा के लिए अवतार लिया था। महाशिवरात्रि पर हनुमान जी की इस विशेष पूजा के पीछे मान्यता है कि इससे भक्तों को शिव और शक्ति दोनों का आशीर्वाद एक साथ प्राप्त होता है। शास्त्रों में भी हनुमान जी को ‘रुद्रात्मकाय’ यानी शिव का ही स्वरूप माना गया है, इसलिए इस दिन उनकी आराधना का विशेष महत्व है।

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