लौद्रवा जैन मंदिर कर्मी की मौत पर गतिरोध खत्म:देर रात ट्रस्टियों और परिजनों के बीच बनी सहमति, आज हुआ पोस्टमार्टम

जैसलमेर के प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र लौद्रवा के ट्रस्ट में कार्यरत 34 वर्षीय जितेंद्र जैन की संदिग्ध मौत के बाद पिछले 24 घंटों से चला आ रहा हंगामा रविवार सुबह शांत हो गया। शनिवार रात से ही जवाहिर हॉस्पिटल की मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठे परिजनों और जैन समाज के लोगों को पुलिस और प्रशासन ने समझाइश कर शांत करवाया। देर रात ट्रस्ट के पदाधिकारियों के पहुंचने और सामाजिक स्तर पर सहमति बनने के बाद परिजन पोस्टमार्टम के लिए राजी हुए। देर रात तक चली वार्ता, सुबह हुआ पोस्टमार्टम शनिवार शाम से ही फलोदी निवासी मृतक जितेंद्र के परिजन और रिश्तेदार राजेंद्र कुमार बोथरा व मनोज जैन के नेतृत्व में मोर्चरी के बाहर डटे हुए थे। परिजनों का आरोप था कि ट्रस्ट के व्यवस्थापक वर्धमान सिंघवी (कोटा निवासी) द्वारा पिछले 2-3 महीनों से जितेंद्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे उसकी तबीयत बिगड़ी और जोधपुर ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। देर रात तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद ट्रस्ट के लोग मौके पर पहुंचे। सदर थाना प्रभारी प्रेमदान रतनू की मध्यस्थता में ट्रस्टियों और परिजनों के बीच लंबी वार्ता हुई। रविवार सुबह सामाजिक स्तर पर आपसी सहमति बनने के बाद परिजनों ने आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया। थाना प्रभारी की मौजूदगी में प्रक्रिया पूरी रविवार सुबह सदर थाना प्रभारी प्रेमदान रतनू की मौजूदगी में जितेंद्र के शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। पुलिस प्रशासन ने परिजनों को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया, जिसके बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने पैतृक निवास ले जाने को तैयार हुए। क्या था पूरा मामला? मृतक के रिश्तेदार राजेंद्र कुमार बोथरा ने बताया- मृतक जितेंद्र (34) पिछले डेढ़ साल से लौद्रवा ट्रस्ट में कार्यरत था। वहां एक व्यवस्थापक उस पर अनर्गल आरोप लगाकर प्रताड़ित कर रहा था।शनिवार को कार्यस्थल पर विवाद के बाद जितेंद्र बेहोश हो गया। उसे जैसलमेर से जोधपुर रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। परिजनों ने आरोप लगाया था कि ट्रस्ट के रसूख के चलते पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है और वे शव को लौद्रवा ले जाने की मांग पर अड़े थे। सामाजिक सुलह से थमा विवाद “देर रात ट्रस्ट के प्रतिनिधियों और मृतक के परिजनों के बीच सकारात्मक बातचीत हुई। सामाजिक स्तर पर आपसी सहमति बनने के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम के लिए अपनी स्वीकृति दे दी। पुलिस नियमानुसार मामले की जांच कर रही है।” — प्रेमदान रतनू, थाना प्रभारी, सदर थाना जैसलमेर

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