भारतीय सेना की संचार रीढ़ कही जाने वाली प्रतिष्ठित इकाई ‘कोरप्स ऑफ सिग्नल्स’ का 116वां कोरप्स डे रविवार को झुंझुनूं जिला मुख्यालय पर मनाया गया। रिटायर्ड सिग्नलर्स कल्याण समिति के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में जिले भर से आए पूर्व सैनिकों ने शहीद स्मारक पर एकत्रित होकर देश की वेदी पर प्राण न्यौछावर करने वाले वीरों को याद किया। शहीद वेदी पर दी भावभीनी श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत शहीद स्मारक पर पुष्प चक्र अर्पित करने के साथ हुई। पूर्व सैनिकों ने कतारबद्ध होकर शहीद वेदी पर पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखकर अपने साथी शहीदों के बलिदान को याद किया। इस दौरान वातावरण ‘भारत माता की जय’ और ‘कोरप्स ऑफ सिग्नल्स अमर रहे’ के नारों से गुंजायमान हो उठा। सेना में सिग्नल्स का महत्व और पूर्व सैनिकों का संवाद रिटायर्ड सिग्नलर्स कल्याण समिति के सदस्यों ने इस अवसर पर भारतीय सेना में कोरप्स ऑफ सिग्नल्स की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि युद्ध हो या शांति का समय, संचार व्यवस्था को सुचारू रखना सेना की सफलता की पहली शर्त होती है और सिग्नलर्स इस जिम्मेदारी को बखूबी निभाते हैं। पूर्व सैनिकों ने सेना में बिताए अपने अनुभवों को साझा किया। रिटायर्ड सैनिकों की समस्याओं और कल्याणकारी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। आपसी समन्वय बढ़ाकर संगठन को और मजबूत करने का संकल्प लिया गया।
आज हमारे कोरप्स का 116वां स्थापना दिवस है। यह दिन हमें उन वीर साथियों की याद दिलाता है जिन्होंने देश की अखंडता के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारा उद्देश्य न केवल शहीदों को याद करना है, बल्कि पूर्व सैनिकों के परिवार को एक सूत्र में पिरोकर रखना भी है। सूबेदार राजवीर सिंह पूनिया कोरप्स ऑफ सिग्नल्स भारतीय सेना का तकनीकी स्तंभ है। सेवानिवृत्ति के बाद भी हमारे भीतर वही अनुशासन और राष्ट्रप्रेम की भावना है। आज हमने अपनी समस्याओं पर चर्चा की है और हम एकजुट होकर एक-दूसरे की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे।
सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन धूड़सिंह धायल


