MP में पीएम आवास, ग्रामीण सड़कों का फंड खत्म:केंद्र पर मनरेगा योजना का ₹704 करोड़ बकाया, सामाजिक सुरक्षा के 94 करोड़ रुपए अब भी तिजोरी में

एक तरफ महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का नाम बदलकर वी बी जीरामजी किए जाने को लेकर राजनीति हो रही है। दूसरी तरफ इस स्कीम की हालत ये है कि मप्र में मनरेगा का फंड न केवल खत्म हो गया है बल्कि केन्द्र सरकार पर मप्र की 704.64 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया है। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा राज्यसभा में पेश किए गए तीन अलग-अलग विस्तृत जवाबों ने देश और विशेषकर मध्य प्रदेश में ग्रामीण विकास की वास्तविक स्थिति को उजागर किया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि मध्य प्रदेश ने कई योजनाओं में बजट का शानदार उपयोग किया है, लेकिन मनरेगा और सामाजिक सहायता जैसी योजनाओं में चुनौतियां बनी हुई हैं। एमपी की स्थिति- आवास और सड़कों में ‘जीरो बैलेंस’ प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण: ₹0.00 (पूरा फंड खर्च) प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: ₹0.00 (पूरा फंड खर्च) कौशल विकास (DDU-GKY): ₹0.00 वाटरशेड विकास: ₹0.00 (संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 9 फरवरी 2026 तक मध्य प्रदेश के पास निम्नलिखित योजनाओं में कोई पैसा शेष नहीं था) मनरेगा: काम पूरा, पर भुगतान का इंतजार राज्यसभा में सांसद दिग्विजय सिंह और डॉ. जॉन ब्रिटास के सवालों के जवाब में जो आंकड़े आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं: चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 (9 फरवरी 2026 तक) में मध्य प्रदेश पर मनरेगा के तहत कुल 704.64 करोड़ रुपए की देनदारी बकाया है। इसमें मजदूरी और सामग्री दोनों का हिस्सा शामिल है। मप्र के पास मनरेगा के ‘स्टेट नोडल अकाउंट’ में पैसा शेष नहीं है (10 फरवरी तक -0.01997 लाख रुपए का बैलेंस), जो दर्शाता है कि राज्य को केंद्र से अतिरिक्त फंड की तत्काल आवश्यकता है। पिछले वर्षों का ट्रेंड: मध्य प्रदेश को केंद्र से मिलने वाली राशि में लगातार वृद्धि हुई है। जहां 2022-23 में 5711.77 करोड़ रुपए मिले थे, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 6252.03 करोड़ रुपए हो गए। आवास और सड़क निर्माण: लक्ष्य के करीब मध्य प्रदेश सांसद संजय सिंह के प्रश्न के उत्तर से पता चलता है कि मध्य प्रदेश बुनियादी ढांचे के निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G)में मध्य प्रदेश के पास इस योजना में शून्य (0.00) बकाया राशि है। इसका सीधा अर्थ है कि राज्य ने केंद्र से मिली किस्तों को लाभार्थियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया है या निर्माण कार्यों में लगा दिया है।
सामाजिक सुरक्षा: 94 करोड़ रुपए अब भी तिजोरी में एक तरफ जहां आवास और सड़क के लिए पैसा कम पड़ रहा है, वहीं राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) के तहत मध्य प्रदेश के पास 9,492.49 लाख रुपए (लगभग 94.92 करोड़) की राशि अव्ययित (Unspent) पड़ी है। यह राशि बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों की पेंशन के लिए होती है। मंत्रालय के अनुसार, इसमें राज्य का अपना योगदान (Top-up) भी शामिल हो सकता है। अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की स्थिति डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख (DILRMP): मध्य प्रदेश के पास रिकॉर्ड्स के डिजिटलीकरण के लिए 26.34 करोड़ रुपए का बैलेंस उपलब्ध है। कौशल विकास: दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) और स्वरोजगार प्रशिक्षण (RSETI) में राज्य का शेष शून्य है, यानी यहां भी फंड का पूरा इस्तेमाल हो चुका है। केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी का गणित मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि मनरेगा में मजदूरी का 100% खर्च केंद्र उठाता है, जबकि सामग्री (Material) के मामले में केंद्र 75% और राज्य 25% खर्च वहन करते हैं। पिछले 5 वर्षों में मध्य प्रदेश सरकार ने भी अपने हिस्से की राशि समय-समय पर जारी की है, जो 2024-25 में करीब 860.89 करोड़ रुपए रही (राज्य का हिस्सा)। फंड यूटिलाइजेशन में एमपी देश के टॉप राज्यों में राज्यसभा के ये तीनों जवाब संकेत देते हैं कि मध्य प्रदेश सरकार “फंड यूटिलाइजेशन” के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में है, क्योंकि अधिकांश योजनाओं में बैलेंस ‘शून्य’ है। हालांकि, मनरेगा की 704 करोड़ की देनदारी एक बड़ी चुनौती है। यदि केंद्र सरकार से जल्द फंड जारी नहीं होता है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में मजदूरी भुगतान में देरी हो सकती है, जिससे ‘वीबी-जीरामजी’ (आगामी मिशन) के लक्ष्यों पर असर पड़ सकता है। पिछले 3 वर्षों में केंद्र द्वारा जारी मनरेगा का फंड राज्य का अपना हिस्सा (सामग्री घटक के लिए): राष्ट्रीय स्तर पर कुल लंबित देनदारियां (प्रमुख राज्य): राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) – राज्यवार शेष राशि (शीर्ष राज्य)

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