महाकाल की तरह कर्क रेखा पर बना मतंगेश्वर मंदिर:बरकोटी में 600 साल पुराना तंत्र शास्त्र से बना मंदिर, तिल-तिल 7.5 फीट बढ़े शिव, कील से रुकी वृद्धि

सागर जिले के ग्राम बरकोटी में प्राचीन मतंगेश्वर महादेव का करीब 600 साल पुराना मंदिर है। यह मंदिर शास्त्रों के मुताबिक बेहद खास है, क्योंकि इसका निर्माण वास्तु शास्त्र से नहीं हुआ, बल्कि तंत्र शास्त्र से किया गया है। इसके साथ ही मतंगेश्वर मंदिर उज्जैन के महाकाल मंदिर के जैसा ही कर्क रेखा पर बना हुआ है। मंदिर में विराजे स्वयंभू भगवान शिव साढ़े 7 फीट के हैं, लेकिन वर्तमान में साढ़े 4 फीट ऊंचे शिवलिंग के दर्शन होते हैं। कहा जाता है कि तिल-तिल कर भगवान भोलेनाथ साढ़े 7 फीट तक बढ़े, जिसके बाद उनके सिर पर कील का निशान बनाया गया। यहीं से उनकी वृद्धि रुक गई। कहा जाता है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता तो उनकी ऊंचाई 21 हाथ तक पहुंच जाती। दरअसल, सागर मुख्यालय से करीब 45 किमी दूर ग्राम बरकोटी स्थित है। गांव में पहुंचते ही मतंगेश्वर महादेव का मंदिर है। यह मंदिर करीब 600 पुराना है। गर्भगृह में विशालकाय पाषाण शिवलिंग को कर्क रेखा पर स्थापित किया गया है। इन्हें स्वयं प्रगट या स्वयंभू शिवलिंग भी कहा जाता है। गर्भगृह में शिव लिंग के पास माता पार्वती और बाहर नंदी विराजमान हैं। इस प्राचीन मंदिर से सटा हुआ एक प्राचीन तालाब भी है। ऐसी मान्यता है कि प्राचीन समय में यह स्थान काल और ज्योतिष गणना का केंद्र रहा, लेकिन समय बदलने और उपेक्षा के कारण यह गुमनामी में खो गया। यहां भगवान भोलेनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। 21 हाथ ऊंचे होने का दिया था स्वप्न, कील का निशान बनाने से रुकी वृद्धि तीन पीढ़ियों से मंदिर की पूजा कर रहे पुजारी पंडित वृंदावन तिवारी बताते हैं कि बरकोटी में पहले जंगल हुआ करता था। यहां पर परमहंस मतंग ने तपस्या की है। अनादि काल पहले उन्हें झाड़ियों में पिंडी मिली थी, उस समय पिंडी का आकार छोटा था, जिनकी वह पूजा करने लगे। तिल-तिल करके शिवलिंग आ आकार लगातार बढ़ रहा था। इसी बीच उन्हें स्वप्न आया कि शिवलिंग के पास कोई निर्माण नहीं कराना। आगे चलकर हम 21 हाथ ऊंचे होंगे, जिसके बाद तिल-तिलकर वृद्धि होकर शिवलिंग की ऊंचाई साढ़े 7 फीट हो गई। शिवलिंग का आकार लगातार बढ़ता देख विद्वानों को बुलाकर विशेष पूजन-अर्चना की गई। शिवलिंग पर कील का निशान बनाया गया, जिसके बाद शिवलिंग की वृद्धि होना रुक गई। तभी से बरकोटी का महादेव मंदिर लोगों के बीच आस्था का केंद्र बना हुआ है। तंत्र शास्त्र से किया गया मंदिर का निर्माण पुजारी ने बताया कि शिवलिंग की वृद्धि रुकने के बाद करीब 600 साल पहले मंदिर का निर्माण कराया गया। उस समय मतंग योगी ने तंत्र शास्त्र से मंदिर का निर्माण कराया, क्योंकि परमहंस के शास्त्र कानून में वास्तु शास्त्र नहीं चलता है, इसलिए मतंगेश्वर महादेव मंदिर का निर्माण तंत्र शास्त्र से हुआ है। मंदिर निर्माण में गांव के मिश्रा परिवार ने सहयोग किया था। उन्होंने बताया कि मंदिर में स्वयं प्रगट और स्वयंभू शिवलिंग विराजमान हैं। शिवलिंग विराजमान होने के बाद मंदिर का निर्माण हुआ है। क्योंकि मंदिर की चौखट की चौड़ाई शिवलिंग से छोटी है। महाकाल जैसा मतंगेश्वर मंदिर भी कर्क रेखा पर बना उज्जैन का महाकाल मंदिर कर्क रेखा पर स्थापित है। ठीक महाकाल मंदिर की तरह ही बरकोटी में मतंगेश्वर महादेव मंदिर कर्क रेखा पर स्थापित है। यहां पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में 23.5 डिग्री 30 मिनट (23°30) होकर कर्क रेखा गुजरती है। ज्योतिष के अनुसार, कर्क रेखा पर सूर्य की किरणे लंबवत होती हैं, जिसके कारण इन स्थानों से राशियों की स्थिति की स्पष्ट जानकारी और काल गणना सटीक ढंग से की जा सकती है। इसके साथ ही महाकाल मंदिर के पास बने रुद्रसागर तालाब की तरह यहां भी दो एकड़ में शिवगंगा तालाब बना है। वर्षों पहले सिर्फ कुआं हुआ करता था। भक्त इसी कुएं से जल भरकर भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते थे, लेकिन समय के साथ आकार बढ़ा और इसने धीरे-धीरे तालाब का रूप ले लिया। मंदिर के जीर्णोद्धार में शिवलिंग की ऊंचाई हुई कम पंडित तिवारी बताते हैं कि वर्षों पहले स्वयंभू शिवलिंग की ऊंचाई साढ़े 7 फीट थी, लेकिन समय के साथ मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया। गर्भगृह में जलहरी का निर्माण, टाइल्स लगाए गए, जिस कारण से शिवलिंग की ऊंचाई कम हुई। वर्तमान में साढ़े 4 फीट ऊंचे शिवलिंग के भक्तों को दर्शन होते हैं। तीन फीट शिवलिंग जमीन के अंदर हैं। महाशिवरात्रि में दर्शन करने पहुंचेंगे 80 गांव के भक्त महाशिवरात्रि पर्व पर मतंगेश्वर महादेव मंदिर परिसर में मेला लगेगा। यहां भगवान के दर्शन करने के लिए करीब 80 गांव के भक्त पहुंचते हैं। मंदिर में सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है। शाम को मंदिर के परिसर से होकर भगवान मंगतेश्वर की विशाल बारात निकाली जाती है। इस बार भोलेनाथ की बारात जैतपुर से निकलकर बरकोटी पहुंचेगी। इसके अलावा मकर संक्रांति पर सात दिवसीय मेले का आयोजन होता है। ऐसी मान्यता है कि कर्क रेखा और तंत्र शास्त्र से बने इस मंदिर में भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने से भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा मिलने के साथ ही मनोकामना पूरी होती है। मतंगेश्वर महादेव मंदिर कैसे पहुंचे सागर से करीब 45 किमी दूर ग्राम बरकोटी स्थित है। बरकोटी नेशनल हाईवे-44 पर पड़ता है जो हाईवे से 2 किमी अंदर है। यहां आने-जाने के लिए पक्की सड़क है। भक्त सागर से यात्री बस में सवार होकर बरकोटी तिगड्‌डा और वहां से मंदिर पहुंच सकता है। निजी वाहन वाले भक्त बरकोटी तिगड्‌डा से राइट टर्न लेकर मतंगेश्वर महादेव मंदिर पहुंच सकते हैं। प्रदेश से आने वाले भक्तों के लिए ट्रेन रूट सागर स्टेशन तक है। स्टेशन से बस में सवार होकर यात्रा करना होगी।

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