आम आदमी पार्टी ने प्रदेशभर में ‘किसान न्याय यात्रा’ की शुरुआत कर दी है। पार्टी धान खरीदी, खाद की कमी और बढ़ती लागत जैसे मुद्दों को लेकर विधानसभा स्तर पर किसानों के बीच पहुंच रही है। AAP का आरोप है कि, 7 लाख से अधिक किसान इस सीजन में अपना धान नहीं बेच पाए। पार्टी ने दावा किया कि करीब 23 लाख टन धान, जिसकी कीमत लगभग 7130 करोड़ रुपए है, जिसे सरकार ने नहीं खरीदा। 5 लाख से ज्यादा किसान बिक्री से वंचित पार्टी नेताओं के मुताबिक, 2.5 लाख पंजीकृत किसानों से सीधे धान नहीं लिया गया, जबकि एग्रीस्टेक पोर्टल की तकनीकी दिक्कतों और रकबा समर्पण की प्रक्रिया के कारण 5 लाख से ज्यादा किसान बिक्री से वंचित रह गए। उनका कहना है कि सरकार ने शुरुआत से ही सीमित खरीदी की नीति अपनाई, जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। AAP ने कहा कि, धान नहीं बिकने से किसान कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। कई परिवारों का सालभर का खर्च धान की फसल पर निर्भर रहता है। पार्टी का आरोप है कि टोकन और भुगतान की समस्या से परेशान होकर कई किसानों ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिनमें दो की मौत हो चुकी है। पार्टी ने खाद की कीमतों और मात्रा में बदलाव को भी मुद्दा बनाया है। नेताओं का कहना है कि पोटाश के दाम बढ़ाए गए हैं। पहले 50 किलो की यूरिया बोरी को 45 किलो और अब 40 किलो कर दिया गया, लेकिन कीमत 267 रुपए ही रखी गई है। सहकारी बैंकों में भुगतान निकालने के लिए किसानों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है और एक बार में 25 हजार रुपए ही दिए जा रहे हैं। केंद्र सरकार की नई ट्रेड डील पर भी AAP ने सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि अमेरिका के कृषि उत्पादों पर 0% टैरिफ लगाया गया है, जबकि भारत पर 18% टैरिफ लागू है। इससे अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद सस्ते दामों पर भारतीय बाजार में आएंगे और स्थानीय किसान प्रभावित होंगे। राजनांदगांव से शुरुआत ‘किसान न्याय जनसभा’ की शुरुआत राजनांदगांव से हुई। यहां आयोजित जनसभा में सैकड़ों किसान शामिल हुए और अपनी समस्याएं साझा कीं। किसानों ने बताया कि जिले के हजारों किसान धान नहीं बेच पाए, जिससे उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। जनसभा में पार्टी नेताओं ने भरोसा दिलाया कि किसानों की समस्याओं को प्रदेश स्तर तक ले जाया जाएगा और समाधान के लिए मजबूती से आवाज उठाई जाएगी। किसानों ने कहा कि फसल के लिए लिया गया कर्ज चुकाना मुश्किल हो गया है और सरकार की नीतियों ने उन्हें आर्थिक परेशानी में डाल दिया है।


