सलूंबर में महाशिवरात्रि के मौके पर सैरिंग तालाब की पहाड़ी पर स्थित करीब 500 वर्ष प्राचीन जागेश्वर महादेव मंदिर में विशेष आयोजन हुआ। तड़के सुबह 5 बजे डमरू और ढोल-नगाड़ों के साथ ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच भगवान आशुतोष का भस्म से श्रृंगार कर महाआरती की गई। यह प्राचीन मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, इसकी स्थापना कई शताब्दियों पहले हुई थी। मंदिर परिसर में संत-महात्माओं की समाधियां और धूणी कक्ष इस स्थान के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को दर्शाते हैं। मंदिर में उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर भस्म आरती की जाती है। महाशिवरात्रि के विशेष आयोजन में शिवलिंग स्वरूप भगवान आशुतोष का विधिवत भस्मीभूत श्रृंगार कर महाआरती संपन्न हुई। महाशिवरात्रि पर्व पर सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। महिला, पुरुष और बच्चों की लंबी कतारें देखी गईं। भक्तों ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में भगवान को रजत श्रृंगार भी अर्पित किया गया। सैरिंग तालाब के किनारे और पहाड़ी की प्राकृतिक सुंदरता के बीच स्थित यह मंदिर धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व रखता है। महाशिवरात्रि पर यहां का वातावरण किसी तीर्थस्थल जैसा ही लगता है। श्रद्धालुओं ने बताया कि जागेश्वर महादेव मंदिर केवल पूजा-अर्चना की जगह नहीं, बल्कि संतों की साधना स्थली और सनातन आस्था का प्रतीक है।


