राज्य बनने के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब निगम चुनाव में शहर की चारों विधानसभा में कांग्रेस प्रत्याशी बुरी तरह पिछड़ गए। हालांकि हर विधानसभा में विधायक रहे या चुनाव लड़ चुके कद्दावर नेताओं को पार्षदों को जिताने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वे भी पार्षदों को उम्मीद के अनुसार जीत नहीं दिला सके। इनमें से अधिकतर नेता तो जिस वार्ड में रहते हैं वहां भी कांग्रेस प्रत्याशी की हार हो गई। इसी का नतीजा रहा कि रायपुर उत्तर विधानसभा के 21 वार्डों में 1, पश्चिम के 19 वार्डों में 3, दक्षिण के 20 वार्डों में 2 और ग्रामीण विधानसभा के 10 वार्डों में कांग्रेस का एक प्रत्याशी ही चुनाव जीत सका है। पिछला विधानसभा चुनाव हारे कांग्रेसी नेता कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, पंकज शर्मा और आकाश शर्मा की नाराजगी के बावजूद रायपुर नगर निगम के 70 वार्डों के टिकट वितरण में प्रदेशाध्यक्ष दीपक बैज और जिलाध्यक्ष गिरिश दुबे का खासा दखल रहा। इस दौरान पैनल में नाम जोड़ने और काटने में भी बड़े नेताओं की अनसुनी की की चर्चा रही। टिकट बांटने को लेकर अब कई तरह के लग रहे आरोप राजधानी के 70 वार्डों में केवल 7 वार्ड में जीत के बाद अब कांग्रेस में अंदरूनी घमासान शुरू हो गया है। जिला दफ्तर से प्रदेश कार्यालय तक टिकट वितरण को लेकर कई तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं। कांग्रेस के बड़े नेताओं की लापरवाही को लेकर भी चर्चाएं हैं। नामांकन खत्म होने के 24 घंटे पहले तक कांग्रेस की सूची जारी नहीं की गई थी। टिकट वितरण में कितनी लापरवाही की गई इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंतिम समय तक चार वार्डों के उम्मीदवार फाइनल ही नहीं किए गए थे। इन सभी को सीधे बी-फॉर्म दिया गया है। टिकट वितरण में देरी की वजह से भी कांग्रेस उम्मीदवारों को चुनावी तैयारी का ज्यादा समय नहीं मिला। इस वजह से भी वार्डों में कांग्रेस की करारी हार हुई। निर्दलीय आकाश तिवारी को वापस लाने के प्रयास शुरू निर्दलीय पार्षद आकाश तिवारी की एक हजार से ज्यादा वोटों से जीत के बाद अब उनकी वापसी के लिए प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। पूर्व विधायक विकास उपाध्याय और कुलदीप जुनेजा ने आकाश की वापसी के लिए बड़े नेताओं तक बात पहुंचा दी है। बताया जा रहा है कि आकाश के साथ ही दो निर्दलीय भी कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं। इन निर्दलीय पार्षदों की वापसी के लिए भी उनसे बातचीत शुरू हो गई है। तीन निर्दलीय पार्षदों की वापसी के बाद सदन में कांग्रेस के 10 पार्षद हो जाएंगे। आकाश पहले एमआईसी सदस्य रह चुके हैं। निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर आकाश ने एक हजार वोटों से ज्यादा के अंतर से जीत हासिल की है। इस वजह से उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाने लॉबिंग की जा रही है। इसके अलावा दूसरी बार पार्षद बने संदीप साहू और करीब दो दशक से कांग्रेस के संगठन में काम कर रहे शेख मुशीर ने भी अपना दावा ठोंका है। विस चुनाव के बाद नहीं सुधरा प्रदर्शन, नाराज रहे कार्यकर्ता पिछले साल विधानसभा में हारे हुए उम्मीदवारों का इस बार निगम चुनाव में भी प्रदर्शन बेहद खराब रहा। चारों विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशियों को अपने-अपने वार्डों से कोई लीड नहीं मिली थी। इस बार निगम चुनाव में भी यही हाल रहा। इक्का-दुक्का वार्डों को छोड़कर उन्हें उतने वोट भी नहीं मिले जितने विधानसभा चुनाव में मिले थे। बताया जा रहा है कि कांग्रेस को केवल मौदहापारा, राजातालाब, मौलाना अब्दुल रऊफ वार्ड बैजनाथपारा और संजयनगर के ही बूथों से लीड मिली। इसके अलावा किसी भी वार्ड से कांग्रेस के महापौर प्रत्याशी को लीड नहीं मिली।


