राजस्थान के चर्चित करोड़ों के मायरे के बीच नागौर के रियां बड़ी के पादूकलां गांव के जाट समाज ने शादियों में फिजूलखर्ची को रोकने का निर्णय लिया है। शिवरात्रि पर हुई बैठक में दिखावे को रोकने के लिए शादी, मायरे, मकान के मुहूर्त और किसी की मौत हो जाने पर फिजूलखर्ची नहीं करने पर सहमति बनी है। इसमें हल्दी-मेहंदी की रस्म नहीं करने और शादियों में अधिकतम 5 तोला सोना देने का फैसला किया गया है। रियां बड़ी सरपंच प्रतिनिधि मदन गोरा ने बताया- समाज के लोग देखा-देखी में बड़े मायरे और शादियां करके कर्ज में डूब रहे हैं। इसी लिए जाट समाज ने फैसला लिया है कि इन पर लगाम लगाई जा सके। इसके लिए पादूकलां के सूरजपुरी महाराज के स्थान बैठक रखी गई। पढ़ें समाज की बैठक में क्या हुए फैसले फिजूलखर्ची रोकने का फैसला सरपंच प्रतिनिधि मदन गोरा ने बताया- शादियों और मृत्युभोज पर फिजूलखर्ची की जाती है। आज सोना-चांदी के भाव आसमान छू रहा है। गरीब लोग दिखावे और सामाजिक दबाव के कारण सोना-चांदी खरीद लेते हैं, लेकिन कर्ज में डूब जाते हैं। ऐसे में पादूकलां सर्व जाट समाज ने यह निर्णय लिया है कि इस फिजूलखर्ची को रोका जाएगा। पढ़ें ये खबर भी… बीकानेर में भांजों की शादी में भरा 1.56-करोड़ का मायरा:सोलर कंपनी मालिकों ने 1.11 करोड़ कैश दिए; हनुमान बेनीवाल भी हुए शामिल बीकानेर में सोलर कंपनी मालिक 2 भाइयों ने अपने भांजों की शादी में एक करोड़ 56 लाख रुपए का मायरा भरा। 1 करोड़ 11 लाख रुपए कैश, सवा किलो चांदी और 31 बरी (372 ग्राम) सोना भेंट किया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 45 लाख रुपए आंकी गई है। (पढ़ें पूरी खबर) भांजा-भांजी की शादी में भरा 3 करोड़ का मायरा:1.51 करोड़ रुपए नकद लेकर पहुंचे 3 मामा; सोने-चांदी के गहने और 2 प्लॉट भी दिए शादी में मायरा (भात) भरने की प्रथा को लेकर राजस्थान का नागौर जिला एक बार फिर चर्चा में है। 3 भाइयों ने अपने भांजे-भांजी की शादी में 1 करोड़ 51 लाख रुपए नकद, सोने-चांदी की ज्वेलरी और शहर में 2 प्लॉट समेत करीब 3 करोड़ रुपए का मायरा भरा। (पढ़े पूरी खबर)


