महाशिवरात्रि पर निकली भोले बाबा की बारात, रात में विवाह:46 वें वर्ष आयोजन, नाचते-गाते निकले बाराती, शिवालयों में भक्तिभाव से पूजा-अर्चना

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर अंबिकापुर के सहेली गली से बाबा भोलेनाथ की बारात निकाली गई। बाजे-गाजे के साथ निकाली महादेव की बारात में सैकड़ों श्रद्धालु बाराती बनकर शामिल हुए। शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए भोलेनाथ की बारात पुलिस लाइन स्थित मां गौरी के मंदिर में रात को पहुंचेगी, जहां विधि-विधान के साथ मां पार्वती के साथ शादी की रस्में होंगी। सोमवार सुबह बारात की विदाई होगी। महाशिवरात्रि के अवसर पर 46 वर्षों से यह आयोजन किया जा रहा है। बाबा भोलेनाथ की बारात दोपहर बाद पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना के बाद निकाली गई। शहर के मुख्यमार्गों में श्रद्धालुओं ने बारात का स्वागत किया और आरती उतारकर पूजा अर्चना की। जगह-जगह भक्तों को प्रसाद का वितरण भी किया गया। गाजे-बाजे के साथ निकली बाबा भोलेनाथ की बारात में लोग झूमते हुए शामिल हुए। विधि-विधान के साथ होगा शुभ विवाह बाबा भोलेनाथ की बारात देर रात गौरी मंदिर पहुंचेगी, जहां बारात का स्वागत होगा व अन्य परंपराओं का पालन होगा। गौरी मंदिर में जयमाला के साथ रीति-रिवाज से विवाह संपन्न होगा। बारात की विदाई अगले दिन की जाएगी। मंदिर में विशाल भंडारे का आयोजन भी किया गया है। आयोजन में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। शिवालयों में उमड़े श्रद्धालु
महाशिवरात्रि के अवसर पर सुबह से ही शिवालयों में भक्तों का तांता लगा रहा। शिवालयों में पहुंचकर भक्तों ने विधि-विधान से पूजा अर्चना की। नगर के शंकरघाट स्थित शिवमंदिर सहित महाकाल शिव मंदिर नावापारा और अन्य प्रमुख शिवालयों में भक्तों की कतार लगी रही। नगर में जगह-जगह भंडारे का आयोजन किया गया। प्राचीन देवगढ़ एवं महेशपुर में उमड़े श्रद्धालु
जिले के प्राचीनतम देवगढ़ और महेशपुर मंदिरों में सुबह से श्रद्धालुओं की लंबी लाइन लगी रही। देवगढ़ में अर्धनारीश्वर शिव की पूजा के लिए सरगुजा-सूरजपुर सहित दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचे थे। यह शिव मंदिर शैव संप्रदाय के काल का माना जाता है। देवगढ़ में भी भक्तों का तांता लगा रहा। दोनों प्राचीन शिव मंदिरों में प्रशासन और मंदिर समितियों के द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल भी तैनात रहा। महाशिवरात्रि के अवसर पर देवगढ़ में तीन दिवसीय मेले का आयोजन होता है। यहां तीन दिनों तक भक्त पहुंचते हैं।

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