रोजगार का लालच देकर महाराष्ट्र ले जाई गईं पांच आदिवासी महिला मजदूरों और उनके साथ गए चार नाबालिग बच्चों को बंधुआ जैसी स्थिति से मुक्त कर विदिशा पुलिस ने सकुशल उनके घर पहुंचाया। कार्रवाई महाराष्ट्र के सोलापुर और बीड पुलिस के समन्वय से की गई। जानकारी के अनुसार, गुलाबगंज थाना क्षेत्र के ग्राम सुआखेड़ी और करारिया थाना क्षेत्र के ग्राम रुसल्ली के मजदूरों को तीन महीने पहले ग्वालियर में गन्ना कटाई का काम दिलाने का झांसा देकर ले जाया गया था, लेकिन उन्हें महाराष्ट्र के सोलापुर और बीड जिले में ले जाकर काम पर लगा दिया गया। आरोप है कि पहले महीने मजदूरी दी गई, लेकिन दूसरे महीने से भुगतान रोक दिया गया और भोजन तक के लिए परेशान किया गया। कुछ दिन पहले कुछ मजदूर वहां से भागकर विदिशा पहुंचे और पुलिस अधीक्षक रोहित काशवानी से शिकायत कर परिवार के सदस्यों को वापस लाने की मांग की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसपी के निर्देशन में टीम गठित की गई। विदिशा पुलिस ने महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क कर संयुक्त कार्रवाई की और सभी महिलाओं व बच्चों को मुक्त कराया। ग्वालियर के नाम पर महाराष्ट्र ले गए थे
एसपी रोहित काशवानी ने बताया कि 11 फरवरी को शिकायत प्राप्त हुई थी। जांच के बाद तत्काल समन्वय स्थापित कर मजदूरों को सुरक्षित वापस लाया गया है। संबंधित मामले में बीड पुलिस वैधानिक कार्रवाई कर रही है। पीड़िता संगीता आदिवासी ने बताया कि उन्हें ग्वालियर के नाम पर महाराष्ट्र ले जाया गया था। “पहले महीने पैसे दिए, फिर मजदूरी रोक दी। खाने तक के लिए परेशान होना पड़ा।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षित वापसी के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली। ग्रामीणों ने इसे बंधुआ मजदूरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताते हुए पुलिस की तत्परता और संवेदनशीलता की सराहना की है।


