“”दालों की खेती के महत्व पर प्रकाश डाला कि दालें न केवल प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं, बल्कि ये मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दालों की खेती से नाइट्रोजन स्थिरीकरण होने के कारण रासायनिक खादों की जरूरत कम होती है, जिससे खेती की लागत घटती है और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार होता है।” यहां की मुख्य कृषि अधिकारी हरप्रीतपाल कौर यहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में किसानों को संबोधित कर रही थी। किसानों को दालों के महत्व के प्रति जागरूक करने के लिए इसका आयोजन किया गया। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना के कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदीश अरोड़ा ने कहा कि भारत में दालों की मांग लगातार बढ़ रही है, लेकिन उत्पादन कम होने के कारण देश को बड़ी मात्रा में दालों का आयात करना पड़ता है। यदि किसान दालों की खेती की ओर अधिक ध्यान दें, तो देश की आयात पर निर्भरता कम की जा सकती है और किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। ब्लॉक कृषि अधिकारी बलदेव सिंह ने बताया कि मूंग, मसूर, चना, मटर, अरहर जैसी दालें सूबे की मिट्टी और मौसमी हालात के अनुकूल हैं। उन्होंने किसानों को फसल चक्र में दालों को शामिल करने की सलाह दी, ताकि मिट्टी की उर्वरता बनी रहे और पैदावार बढ़े। गर्मियों में मूंग की खेती, रबी के मौसम में मसूर और चने की बुवाई तथा कुछ क्षेत्रों में अरहर की खेती कर किसान कम लागत में अच्छा लाभ ले सकते हैं। एग्रो डेस्क| जालंधर भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर किसानों संगठनों की गहमागहमी के बीच फरवरी के आखिरी हफ्ते में नई दिल्ली में तीन दिवसीय पूसा कृषि विज्ञान मेला लग रहा है। इसका थीम विकसित कृषि-आत्मनिर्भर भारत है। मार्च में लुधियाना स्थित पंजाब खेतीबाड़ी यूनिवर्सिटी (पीएयू) प्रदेश में किसान मेलों की शृंखला शुरू कर रही है, जो गुरदासपुर में 27 मार्च के आयोजन के साथ संपन्न हो जाएगी। पीएयू में किसान मेला 20-21 मार्च को लगेगा। पूसा कृषि विज्ञान मेला 25-27 फरवरी को दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के मेला ग्राउंड में लगेगा। इसमें किसानों के अलावा कृषि व संबद्ध क्षेत्रों से विज्ञानी, अधिकारी, छात्र, उद्यमी हिस्सा लेंगे। इस मेले में कृषि योजनाएं, फसल विविधीकरण एवं जलवायु तन्यक कृषि, महिलाओं एवं युवाओं का उद्यमिता विकास, कृषि विपणन, कृषक संगठन एवं स्टार्टअप, डिजिटल खेती, किसानों के नवाचार आकर्षण होंगे। पंजाब में किसान मेला (फाइल फोटो) कार्यक्रम में किसानों के साथ अधिकारी।


