प्रगतिशील किसान:नौकरी छोड़ मधुमक्खी पालन जैसी फसल-वैसा शहद का स्वाद

राजसमंद जिले के पिपली अहिरान मेघाखेड़ा गांव के डॉ.सीताराम सीरवी ने कृषि की पढ़ाई करके एक विश्वविद्यालय में कुछ समय नौकरी की। अब वे मधुमक्खी पालन कर रहे हैं। इसके लिए वे राजस्थान और मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में जाकर मधुमक्खियों के बॉक्स रखते हैं। ताकि अलग-अलग स्वाद और सुगंध का शहद मिल सके। फिलहाल वे 10 प्रकार के शहद का उत्पादन कर रहे हैं। यह शहद 400 से 2500 रुपए प्रति किलो तक में बिक रहा है। इनके मधुमक्खी पालन करने से आस-पास के करीब तीन किमी दायरे में मधुमक्खियों का विचरण हो रहा है। इससे उनके परागकणों से अन्य किसानों के खेतों में भी पैदावार बढ़ रही है। सीरवी ने बताया कि वे तुलसी, बरसीम, सरसों, बबूल, धनिया, सौंफ, अजवाइन-तिल मिश्रित तथा मल्टी फ्लोरा सहित लगभग 10 प्रकार के शहद का उत्पादन ले रहे हैं। इनमें मल्टी फ्लोरा शहद की बाजार में मांग बहुत ज्यादा है। सौंफ के शहद के लिए सिरोही जिले में बॉक्स रखने पड़ते हैं। इसी तरह तुलसी व अजवाइन के लिए चित्तौड़गढ़ के मातृकुंडिया क्षेत्र में, धनिया व बरसीम-रिजका के शहद के लिए मध्यप्रदेश के मुरैना जिले में, सहजन के स्वाद के लिए जालोर जिले में और मिक्स फ्लावर के लिए राजसमंद जिले में मधुमक्खी के बॉक्स रखते हैं। यहां कम से कम 40 से 80 दिन रुकना पड़ता है। इसके बाद शहद मिल पाता है। आर्थिक रूप से परिवार की स्थिति कमजोर होने के कारण सरकारी स्कूलों से ही पढ़ाई की। इसके बाद उदयपुर के विश्वविद्यालय से बीएससी-एमएससी के बाद पीएचडी की। परिवार वर्षों से अन्य किसानों के साथ साझेदारी में परंपरागत खेती करता रहा, जिसके चलते आमदनी बहुत कम होती थी, लेकिन मधुमक्खी पालन से परिवार के जीवन का स्तर सुधर गया है। सिरोही में सहायक प्रोफेसर रहते हुए स्वरोजगार शुरू किया। शुरुआत में सिर्फ 5 बॉक्स थे, अब 150 से अधिक बॉक्स हो गए हैं। इसमें दो तीन लाख रुपए खर्च भी हुए लेकिन अब 10 से 12 लाख रुपए सालाना आमदनी होने लगी है। इससे दूसरों को भी रोजगार मिल रहा है। एक बॉक्स से औसतन 55 से 60 किलो तक शहद उत्पादन हो रहा है। वहीं क्षेत्र में मधुमिक्खयों की सक्रियता से सरसों, सब्जी, फलदार पौधों सहित अन्य फसलों में फूलों का बेहतर परागण हो रहा है, जिससे उपज और किसानों की आमदनी बढ़ी है। इस नवाचार के लिए महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि, उदयपुर की ओर से 26 जनवरी को सम्मानित भी किया गया है।

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