भास्कर न्यूज | राजसमंद राजसमंद-पाली सीमा से सटी दिवेर घाटी एक बार फिर गोलियों की गूंज से दहल उठी। एंटी नार्कोटिक टास्क फोर्स (एएनटीएफ) पाली और तस्करों के बीच खिंवाड़ा थाना क्षेत्र में हुई मुठभेड़ में जोधपुर के सरनाडा (डांगियावास) निवासी 36 वर्षीय भूटाराम उर्फ भूट्टा की सीने में गोली लगने से मौत हो गई। उसके साथी दिनेश उर्फ नैनाराम को हिरासत में लिया है। तस्करों की स्कॉर्पियो से करीब 500 किलो डोडा चूरा, एक पिस्टल, एक दर्जन कारतूस और 4-5 अलग-अलग नंबर प्लेट बरामद हुई हैं। पाली एएसपी चैनसिंह महेचा के अनुसार सूचना के आधार पर नाकाबंदी की गई थी। इस दौरान दो संदिग्ध गाड़ियां आईं और बैरिकेड तोड़कर निकलने की कोशिश की। पुलिस ने टायर बस्टर लगाया, जिससे दूसरी गाड़ी रुक गई। तभी तस्करों की ओर से 4-5 राउंड फायर किए। जवाबी कार्रवाई में चली गोली भूटाराम के सीने में लगी। उसे बांगड़ अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस के मुताबिक दूसरी गाड़ी से भी फायरिंग की गई थी। ड्रग कॉरिडोर बनती दिवेर घाटी: अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित दिवेर घाटी मेवाड़ और मारवाड़ को जोड़ने वाला अहम रास्ता है। दिवेर के पास सातपालिया घाटा जंगल से होकर गुजरता है। रात के समय तस्कर इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। नाकाबंदी होने पर वाहन छोड़कर पहाड़ियों में फरार होना इनके लिए आसान होता है। बीते कुछ वर्षों में यह क्षेत्र ड्रग तस्करी का ट्रांजिट पॉइंट ही नहीं, बल्कि सुरक्षित कॉरिडोर बनता जा रहा है। वर्ष 2023 की मुठभेड़ में एक तस्कर ढेर हुआ, 2024 में सिंथेटिक ड्रग्स (एमडीएमए) की बड़ी खेप जब्त की और हालिया कार्रवाई 300 किलो से अधिक डोडा पकड़ा गया और अब 500 किलो डोडा के साथ फिर एनकाउंटर हुआ हैं। दिवेर घाटी पहाड़ी रास्ते, सीमित नाकाबंदी और राजसमंद-पाली-जोधपुर कनेक्टिविटी तस्करों को वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराती है। फर्जी नंबर प्लेट, छोटे वाहन और रात में मूवमेंट नया ट्रेंड बन चुका है। हालांकि 14 अप्रैल 2015 को दिवेर के तत्कालीन थानाधिकारी रमेश कविया के सिर में गोली लगी थी। गंभीर घायल होने पर उनका उपचार अहमदाबाद में चला। राजसमंद-पाली जिले के खिंवाड़ा थाना क्षेत्र में दिवेर नाल यानि घाट सेक्शन में खीमज माता मंदिर के निकट 16 अक्टूबर 2023 की देर रात को राजसमंद की डीएसटी (डिस्ट्रिक्ट स्पेशल टीम) और तस्करों के बीच जमकर मुठभेड़ हुई थी। पुलिस की ओर से की गई फायरिंग में जोधपुर के फिटकासनी गांव के तस्कर सुभाष बावल उर्फ मेवाड़ा पुत्र मेकाराम विश्नोई की मौत हो गई। जिसके जबड़े से गोली आर-पार हो गई, जबकि उसकी आंख व कनपटी पर भी गोली लगने के निशान थे। उसकी इनोवा कार में 500 किलोग्राम डोडा पोस्त भरा हुआ था, जिसमें फिटकासनी गांव का ही नामी तस्कर भुट्टो बाबल सवार था, जो फायरिंग के दौरान सुभाष को गोली लगने के बाद हथियार व कार छोड़ पहाड़ी इलाके में भाग गया। पुलिस ने इनोवा कार पुलिस की ओर से लगाई स्टॉप स्टिक (लकड़ी पर नुकेली किले लगी) से आगे के दोनों टायर ब्लास्ट हो गए, लेकिन दोनों तस्कर दो टायरों पर ही कार को दौड़ा कर करीब 4 किलोमीटर दूर पाली जिले की सीमा में खीमज माता मंदिर तक पहुंच गए। पीछा कर रहे पुलिस दल ने फायर किए तो तस्करों की कार का एक और टायर फट गया, जिससे उनकी कार बेकाबू हो गई। इस पर नीचे उतर कर दोनों तस्करों ने 12 बोर की बंदूक व पिस्टल से पुलिस दल वाली स्कार्पियों पर करीब 55 राउंड फायर किए। क्रॉस फायरिंग में पुलिस दल ने चार-पांच फायर किए तो एक गोली तस्कर सुभाष को लगने से मौत हो गई तो साथी फरार हो गया। मौके पर पुलिस को बंदूक, पिस्तौल व कारतूस से भरा बैग, डोंगल, मोबाइल भी मिला।


