भारत-माला प्रोजेक्ट:रायपुर-विशाखापट्टनम हाईवे पर हर 10 किमी में स्पीड डिस्प्ले, हादसों पर शीघ्र अलर्ट

भारत-माला प्रोजेक्ट के तहत बन रहे रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेस के प्रत्येक किलोमीटर पर 125 अत्याधुनिक पीटीजेड (पैन-टिल्ट-जूम) कैमरे लगाए जा रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के मुताबिक अभी तक 101 कैमरे लग चुके हैं। इसके अलावा प्रत्येक पांच किलोमीटर पर बीट्स व्हीकल इंसीडेंट डिटेक्शन सिस्टम लग रहा है। इससे रॉन्ग साइड या फिर किसी प्रकार की दुर्घटना घटती है तो कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी को तुरंत पता चल जाएगा। हर 10 किलोमीटर पर व्हीकल एक्चुएटेड स्पीड डिस्प्ले लगाने का निर्णय लिया है। यह सिस्टम वाहनों की स्पीड को पहचानता है और सामने लगे बड़े एलईडी डिस्प्ले पर दर्शाता है। यदि कोई वाहन निर्धारित रफ्तार से तेज चल रहा है, तो सिस्टम उस स्पीड को लाल रंग में दिखाता है। सामान्य गति को हरा या फिर सफेद रंग में जिससे ड्राइवर अपनी रफ्तार काबू कर सकेंगे। कंट्रोल रूम से चौबीस घंटे मॉनिटरिंग : पीटीजेड कैमरे 360 डिग्री व्यू के साथ हाई-रिजॉल्यूशन रिकॉर्डिंग करेंगे। यह इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर अभनपुर के एनएचएआई कार्यालय में रहेगा, जहां से 24 घंटे मॉनिटरिंग होगी। किसी भी दुर्घटना, वाहन खराब होने या संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत अलर्ट जनरेट होगा। इससे पुलिस, एंबुलेंस और क्रेन जैसी इमरजेंसी सेवाओं को मौके पर तेजी से भेजा जा सकेगा। हाईवे पर प्रत्येक पांच किलोमीटर पर बीट्स व्हीकल इंसीडेंट डिटेक्शन सिस्टम लगने से सड़क पर अचानक रुके वाहन, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, पैदल आवाजाही या असामान्य ट्रैफिक पैटर्न को खुद पहचान लेगा। अलर्ट मिलते ही कंट्रोल रूम संबंधित एजेंसियों को सूचना देगा। इससे हादसे के बाद गोल्डन आवर में राहत पहुंचाने में मदद मिलेगी। यात्रियों को क्या होगा फायदा: :नई व्यवस्था से हाईवे पर सुरक्षा का स्तर बढ़ेगा, दुर्घटनाओं की संख्या में कमी आने की उम्मीद है और ट्रैफिक मैनेजमेंट अधिक प्रभावी होगा। लंबे रूट पर सफर करने वाले ट्रक, बस और निजी वाहन चालकों को त्वरित सहायता मिलेगी। साथ ही स्पीड कंट्रोल और निरंतर निगरानी से ड्राइविंग अनुशासन में सुधार आएगा। ब्लैक स्पॉट पर विशेष फोकस: एनएचएआई ने दुर्घटना-प्रवण ब्लैक स्पॉट्स की पहचान कर वहां अतिरिक्त कैमरे और साइनेज लगाए जा रहे है। हाईवे पेट्रोलिंग को भी टेक्नोलॉजी से जोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी घटना की रियल-टाइम जानकारी मिले। परियोजना के तहत फाइबर नेटवर्क और बैकअप पावर सिस्टम भी विकसित किए जाएंगे, जिससे खराब मौसम या बिजली बाधित होने पर भी निगरानी प्रभावित न हो। दूरी नहीं अंडर और ओवरपास से तय होगा टोल
ओवरब्रिज और अंडरपास टोल तय करेंगे। क्योंकि जहां ज्यादा अंडर और ओवरपास है वहां सबसे अधिक टैक्स वसूल करेगी। छत्तीसगढ़ में 125 किमी में सरगी से बसनवाही के बीच कुल 56 किमी में 64 मेजर, माइनर, एनीमल अंडर पास और मं‌की कैनोपी हैं। वहीं झांकी से सरगी तक सबसे कम टोल देना पड़ेगा। एनएचएआई दूरी के साथ-साथ अंडरपास, ओवरपास के साथ टनल की लागत भी वसूल करेगी। सबसे हाईटेक और सुरक्षित राजमार्ग बनेगा
रायपुर-विशाखापट्टनम में अलग-अलग प्रकार के कैमरे चरणबद्ध तरीके से लगाए जा रहे है। यह सिस्टम पूरी तरह चालू होने के बाद रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर प्रदेश के सबसे हाई-टेक और सुरक्षित राष्ट्रीय राजमार्गों में शामिल होगा।
-प्रदीप कुमार लाल, रीजनल आफिसर छत्तीसगढ़

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