सरकारी डॉक्टर संभाल रहे पार्किंग-कैंटीन-लॉन्ड्री का जिम्मा:SMS हॉस्पिटल में 30 से ज्यादा के पास ऐसे ऐसे काम, प्रदेश में 4500 हजार डॉक्टरों की कमी

‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ सरकारी डॉक्टर अब मरीजों को नहीं देखेंगे, अब वे आवारा ‘श्वानों (डॉग) को हटाने एवं प्रवेश की रोकथाम करेंगे।’ नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का ये तंज एक सरकारी ऑर्डर को लेकर था। ऑर्डर में एक सरकारी अस्पताल में आवारा श्वानों की रोकथाम के लिए डॉक्टर्स को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। डॉक्टरों को ऐसी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का पहला मामला नहीं है। प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल सवाई मान सिंह (SMS) में 30 से ज्यादा डॉक्टर ऐसी ही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। कोई किचन, कैंटीन, स्टेशनरी की व्यवस्था देख रहा है तो किसी के पास सिक्योरिटी, लॉन्ड्री, हाउसकीपिंग और सीवरेज क्लिनिंग मैनेजमेंट का जिम्मा है। यही नहीं, कई डॉक्टर्स को पार्किंग, अतिक्रमण, ट्रॉली जैसे मैनेजमेंट का काम भी दे रखा है। भास्कर ने सभी डॉक्टर्स की प्रोफाइल को खंगाला तो सामने आया को कोई ईएनटी का स्पेशलिस्ट है तो कोई न्यूरो सर्जन। चौंकाने वाली बात ये है कि प्रदेश पहले से ही साढ़े 4 हजार डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। हार्ट, किडनी के सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर, किचन कैंटीन, स्टेशनरी का भी जिम्मा
जोधपुर और जैसलमेर में हाल ही में दो डॉक्टर्स को हॉस्पिटल में घुसने वाले श्वानों की रोकथाम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। इसके बाद भास्कर टीम ने प्रदेश के सबसे बड़े हॉस्पिटल में ऐसी ही व्यवस्थाओं की पड़ताल की। सामने आया कि 30 से ज्यादा डॉक्टर्स को ऐसी ही जिम्मेदारियों में बांध रखा है। इनमें कोई हार्ट का एक्सपर्ट है तो कोई किडनी स्पेशलिस्ट, लेकिन इन्हें किचन, कैंटीन, स्टेशनरी, पार्किंग से लेकर अस्पताल प्रशासन से जुड़ी कई जिम्मेदारियां दे रखी हैं। इन जिम्मेदारियों के कारण एसएमएस अस्पताल के कुछ डॉक्टर्स ऐसे हैं, जिन्होंने सालों से शायद ही किसी मरीज की नब्ज छुई हो। उनकी उंगलियां अब कीबोर्ड पर टाइपिंग, फाइलों के पन्नों को पलटने, साइन करने और कैंटीन के बिल पास करने में व्यस्त हो गई हैं। चलिए, आपको मिलवाते हैं उन चेहरों से, जो डॉक्टर की डिग्री लेकर ‘एडमिनिस्ट्रेशन’ के चक्रव्यूह में फंसे हैं। 1. डॉ. सतीश वर्मा, एडिशनल सुपरिटेंडेंट जनरल मेडिसिन के विशेषज्ञ हैं। जिम्मेदारी : SMS अस्पताल में किचन, कैंटीन, स्टेशनरी, कॉन्ट्रैक्ट सेल, अकाउंट सेक्शन, रेडियोग्राफर एंड लैब टेक्नीशियन, हेड ऑफिस, डीडीओ गजेटेड, डीडीओ नॉन गजैटेड, इस्टेब्लिशमेंट ऑफिस, बीएमडब्ल्यू एंड जनरल वेस्ट मैनजमेंट। 2. डॉ. अरविंद पालावत, एडिशनल एमओ इंचार्ज जनरल मेडिसिन के विशेषज्ञ हैं। जिम्मेदारी : डीडीओ नॉन गजेटेड, रेडियोग्राफर एंड लैब टेक्नीशियन 3. डॉ.राशिम कटारिया, एडिशनल सुपरिटेंडेंट न्यूरोसर्जन हैं, इसके अलावा भी कई जिम्मेदारियां हैं। जिम्मेदारी : नर्सिंग ड्यूटी मैनेजमेंट इंचार्ज, फार्मासिस्ट ड्यूटी मैनेजमेंट, डीडीसी मैनेजमेंट, बीएमआरसी, आरकेबीसी 4. डॉ. बीएम शर्मा, एडिशनल एमओ इंचार्ज ईएनटी : आंख-कान-गला रोग विशेषज्ञ हैं। जिम्मेदारी : किचन, कैंटीन 5. डॉ. प्रवीण जोशी, एडिशनल एमओ इंचार्ज एमएस : जनरल सर्जन हैं। जिम्मेदारी : पार्किंग की व्यवस्था देखना और लाइफ लाइन इंचार्ज 6. डॉ. राजकुमार हर्षवाल, एडिशनल एमओ इंचार्ज ऑर्थोपेडिक्स : हड्डी एवं जोड़ रोग के विशेषज्ञ हैं। जिम्मेदारी : स्टेशनरी, ईपीबीएक्स 7. डॉ. एनएस चौहान, एडिशनल सुपरिटेंडेंट जनरल फिजिशियन हैं। जिम्मेदारी : अस्पताल के अंदर और पेरीफेरी में अतिक्रमण, आरटीआई, संपर्क पोर्टल, सुगम पोर्टल और ग्रीवान्स के जवाब देना।
8. डॉ. अजीत सिंह, एडिशनल सुपरिटेंडेंट सीनियर फिजिशियन हैं। जिम्मेदारी : सिक्योरिटी, चोरी नियंत्रण, हॉस्पिटल में वॉयलेंस, सीसीटीवी, इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी कन्वीनर, सीजनल डिजीज केस रिपोर्टिंग, धन्वंतरी इंचार्ज, ओपीडी ट्रॉली मैनेजमेंट। 9. डॉ. अनिल दूबे, एडिशनल सुपरिटेंडेंट MBBS डॉक्टर हैं। जिम्मेदारी : सुलभ टॉयलेट क्लीनिंग, कंडम आइटम की नीलामी, आईपीडी टावर, सीटीवीएस टावर, न्यू इमरजेंसी ब्लॉक, सैंपल कलेक्शन सेंटर, साइनेज, आरएमआरएस
10. डॉ. गिरधर गोयल, एडिशनल सुपरिटेंडेंट जनरल सर्जन हैं। जिम्मेदारी : लॉन्ड्री, क्लॉथिंग-लिनेन सेक्शन, ईपीबीएक्स, सेकेंड फ्लोर इंचार्ज, नर्सिंग स्कूल, नर्सिंग हॉस्टल, पैरामेडिकल हॉस्टल, जनरल सेक्शन, ऑर्गन ट्रांसप्लांट कमेटी कन्वीनर इसके अलावा राजस्थान मेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार का अहम पद भी संभाल रहे हैं।
11. डॉ. आलोक तिवारी, एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑर्थोपेडिक्स : हड्डी एवं जोड़ रोग विशेषज्ञ जिम्मेदारी : अस्पताल की फायर सेफ्टी, पीडब्ल्यूडी से जुड़े काम एसएमएस हॉस्पिटल में डॉक्टर्स को इस प्रकार की जिम्मेदारी देने की व्यवस्था कोई आज ही हुई है ऐसा नहीं है। सालों से ये ही व्यवस्था चल रही है। एसएमएस मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया कि अधीक्षक के साथ एडिशनल सुपरिटेंडेंट्स और डिप्टी सुपरिडेंट्स की टीम बना रखी है। इसके अलावा पीडब्ल्यूडी की टीम भी है। ये सभी मिलकर अस्पताल की व्यवस्थाओं को संभालते हैं। प्राइवेट अस्पतालों में इन व्यवस्थाओं के लिए होती है अलग से विंग
सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर्स को ही तमाम तरह की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। प्राइवेट हॉस्पिटल्स में सफाई से लेकर तमाम व्यवस्थाएं विषय विशेषज्ञ, एडमिनिस्ट्रेशन या मैनेजर संभालते हैं। डॉक्टर्स से व्यवस्था को सुधारने के लिए सुझाव जरूर लिए जाते हैं। काम करने या करवाने का पूरा जिम्मा एडमिनिस्ट्रेशन के पास होता है। जयपुर एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर के अध्यक्ष डॉ. राजपाल मीना ने कहा कि अस्पतालों में अलग-अलग व्यवस्था के लिए विभागों के अधिकारियों को ही जिम्मेदारी सौंपना चाहिए। डॉक्टर्स ने जो स्पेशलाइजेशन कर रखा है, उन्हें वही जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। हजारों पद खाली पड़े हैं
प्रदेश में करीब साढ़े चार हजार डॉक्टर्स के पद रिक्त चल रहे हैं। एसएमएस या फिर अन्य सरकारी अस्पतालों में कई डॉक्टर्स इस तरह के कामों की जिम्मेदारी संभालने में व्यस्त हैं। उनकी विशेषज्ञता का लाभ न तो मरीजों को मिल पा रहा है और न ही सरकार को। कई सीएचसी-पीएचसी या फिर जिला अस्पतालों में डॉक्टर्स के पद खाली पड़े हैं। इन 2 आदेश के बाद चर्चा में आई डॉक्टर्स की जिम्मेदारी
8 फरवरी को नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट शेयर की थी। पोस्ट में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी एक ऑर्डर था। इस ऑर्डर में एक महिला डॉक्टर (डेंटिस्ट) को अस्पताल में घुसने वाले आवारा श्वानों की रोकथाम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। हालांकि यह आदेश पिछले महीने जनवरी में जारी हुआ था। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा था।

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