मेरा काम मेरा सच:कॉस्ट्यूम में लोग शर्मिंदा करते थे, लेकिन मेरे लिए खेल सबकुछ था

मैं रोज 9 घंटे जिम में ट्रेनर का काम करती थी। 5’7 हाइट और 80 किलो वजन के साथ यह सफर आसान नहीं था। इससे पहले मैं घरों में पोछा-बर्तन करती थी। जिम में महिला ट्रेनर होने के कारण कई बार लोगों की मानसिकता का सामना करना पड़ा। कई बार गुंडे-बदमाश तक का सामना करना पड़ा। इन सब परिस्थितियों से मैं गुजरी हूं। पीरियड्स के दौरान भी घंटों फ्लोर पर खड़े रहना पड़ता था। जब मैंने बॉडी बिल्डिंग की प्रैक्टिस शुरू की तो ताने सुनने पड़े। ‘ये तो ट्रांसजेंडर बन गई’, ‘इसे शेविंग किट गिफ्ट कर दो’, ‘पता ही नहीं चलता पुरुष है या महिला।’ यह सब सुनकर बुरा लगता था। बॉडी बिल्डिंग के बाद शरीर में कई बदलाव आते हैं। हार्मोनल बदलाव से आवाज और चाल बदल जाती है, शरीर मर्दाना दिखने लगता है, कंधे चौड़े हो जाते हैं। सप्लीमेंट्स के कारण लड़कियों का ब्रेस्ट पार्ट लगभग खत्म हो जाता है और मसल्स उभरकर दिखते हैं। पीरियड तीन-चार साल तक मिस हो सकते हैं। इन बदलावों ने शुरुआत में मुझे भी परेशान किया। मेरी अगली चुनौती बॉडी बिल्डिंग का कॉस्ट्यूम (बिकनी) था। इस कारण मैंने कई दोस्त खो दिए। जब मैंने प्रतियोगिता में कॉस्ट्यूम पहनकर परफॉर्म किया तो एक मीडियाकर्मी ने कहा कि मैं राजस्थान का नाम खराब कर रही हूं। उस वक्त मुझे अपने कोच की बात याद रही। स्टेज पर तीन मिनट के लिए खड़े हों तो भूल जाएं कि सामने कौन है। भीड़ में परिवार ही क्यों न बैठा हो, यह सिर्फ एक गेम है। जब कॉस्ट्यूम में भारत का झंडा लेकर स्टेज पर खड़ी थी, तब भी खराब कमेंट किए गए। शुरुआत में ऐसे कमेंट तनाव देते थे, लेकिन दर्शकों के प्यार ने हौसला भी दिया। 2022 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में मैंने गोल्ड जीतकर सबकी बोलती बंद कर दी। प्रतियोगिता से एक महीने पहले अनाज पूरी तरह छोड़ना पड़ता है। उबला खाना महंगा भी होता है और इतना बेस्वाद कि कई बार उसे मिक्सर में ब्लेंड कर पीना पड़ता था। अगर एक मील में कुछ अतिरिक्त खा लिया तो तैयारी सात दिन पीछे चली जाती थी। प्रतियोगिता से 15 दिन पहले नमक छोड़ देते हैं और 30 घंटे पहले पानी पीना भी बंद कर देते हैं। दवा लेकर शरीर से पानी निकाला जाता है ताकि मसल्स की विजिबिलिटी बेहतर दिखे। दो दिन में एक संतरा या नींबू की कुछ बूंदों से काम चलाना पड़ता है। परफॉर्मेंस से पहले बड़े हॉल में लड़कियां और लड़के खुले में कॉस्ट्यूम में घंटों अपनी बारी का इंतजार करते हैं। शाइनिंग के लिए लगाई जाने वाली प्रो-टेन क्रीम ठंड को और बढ़ा देती है। स्टेज पर बैक, शोल्डर, बायसेप और ट्राइसेप दिखाने होते हैं। मेडल इस बात पर निर्भर करते हैं कि किसकी मसल्स विजिबिलिटी बेहतर है। महिलाओं में टेस्टोस्टेरॉन नहीं होता, इसलिए उन्हें अच्छा वर्कआउट, सख्त डाइट और सप्लीमेंट्स लेने पड़ते हैं। पुरुषों की तुलना में वे चार गुना मेहनत करती हैं। इस खेल में महिलाओं को लेकर नजरिए में बदलाव की अब भी जरूरत है।
-जैसा पूजा शर्मा को बताया

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *