सवाई माधोपुर में 250 साल से ज्यादा पुरानी परंपरा निभाई:महाशिवरात्रि पर सौरती बाजार में त्रिपुरासुर संहार लीला का हुआ मंचन

सवाई माधोपुर के पुराने शहर में महाशिवरात्रि पर अपनी स्थापना के समय से चली आ रही परंपरा निभाई गई। शिवरात्रि के अवसर पर यहां रविवार देर शाम को दो दिवसीय मेले की शुरुआत हुई। यहां के सौरती बाजार में महाशिवरात्रि पर 250 साल से ज्यादा पुरानी पंरपरा का निभाई गई। इससे पहले मुख्य बाजार में भगवान शिवजी की बारात निकाली गई। इसी के साथ शहर के मुख्य बाजार में शोभायात्रा निकाली गई। सप्ताह भर से हो रही थी तैयारियां महाशिवरात्रि मेला समिति के अध्यक्ष मोहन लाल मंगल ने बताया कि यहां स्थानीय लोग महाशिवरात्रि मेले की तैयारियां एक सप्ताह पहले से शुरू कर देते हैं। महाशिवरात्रि से दो दिन पहले ही भगवान शिव का रूप धारण करने वाले कलाकार को इसके लिए तैयार करने की तैयारियां शुरु कर दी गई थीं। भगवान शिव बनने वाले व्यक्ति को दो दिन तक भांग पिलाई जाती है। इसके बाद भस्म से उसका श्रृंगार किया जाता है। यहां महाशिवरात्रि पर सबसे पहले मन्दिर में भगवान शिव की पूजा की जाती है। इसके बाद भगवान का रूप धारण करने वाले कलाकार का श्रृंगार किया गया। भगवान शिव के श्रृंगार करने वाले कलाकार के सिर पर करीब 5 किलो का मुकुट धारण किया गया। कलाकार के शरीर पर श्रृंगार के दौरान भस्म लगाई गई। जिसके बाद शोभायात्रा और त्रिपुरासुर संहार लीला का मंचन हुआ। त्रिपुरासुर संहार लीला का हुआ मंचन सौरती बाजार में आयोजित मेले में त्रिपुरासुर संहार की लीला का मंचन भी किया गया। भगवान शिव बने पात्र ने धनुष के बाण से त्रिपुरासुर का संहार किया गया। जिसके बाद उसकी नगरी का दहन‌ किया गया। त्रिपुरासुर संहार लीला के बाद यहां भगवान शिव की महाआरती की गई।

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