अवैध भूजल दोहन का मामला:प्रदेश में 150 प्रतिशत भूजल दोहन, 214 ब्लॉक अतिदोहित प्रशासनिक लापरवाही, अवैध दोहन पर सख्ती नहीं

प्रदेश में धड़ल्ले से अवैध भूजल दोहन कर कारोबारी बिना स्वीकृति और लाइसेंस के बगैर बॉटलिंग प्लांटों, टैंकरों व कैंपरों के जरिए पानी बेच रहे हैं। अवैध भूजल दोहन की वजह से प्रदेश में 150 प्रतिशत भूजल दोहन व 214 ब्लॉक अतिदोहित हैं। केंद्रीय भूजल प्राधिकरण ने पानी के अवैध दोहन को रोकने के लिए कलेक्टरों को अधिकृत कर रखा है, लेकिन सैकड़ों शिकायतें जिला प्रशासन, जलदाय विभाग और एसडीएम कार्यालयों के बीच घूम रही है। अवैध भूजल दोहन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी की जिम्मेदारी है, लेकिन एसडीएम कार्रवाई करने के बजाए इसे जलदाय विभाग के एईएन को भेजकर खानापूर्ति कर रहे हैं। जयपुर जिले में करीब 20 शिकायतें पेंडिंग हैं। बिना एनओसी भूजल निकालने पर एक लाख से पांच लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है, साथ ही बिजली व पानी की आपूर्ति काट दी जाती है या एनओसी निरस्त की जा सकती है। जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता अनिल शर्मा का कहना है कि कलेक्टर के निर्देशन में एक कमेटी बनी होती है, जिसमें एसडीएम, एईएन व पुलिस अधिकारी होता है। यह कमेटी कार्रवाई करती है। 27 ब्लॉक संवेदनशील, 21 ब्लॉक अर्द्धसंवेदनशील प्रदेश में 150% भूजल दोहन हो रहा है। राज्‍य के भू-जल संसाधनों की नवीनतम आकलन रिपोर्ट वर्ष-2024 में 295 पंचायत समितियों (ब्लॉक) तथा 7 शहरी क्षेत्रों सहित कुल 302 इकाइयों का आंकलन किया गया है। जिसमें 214 ब्लॉक अतिदोहित, 27 ब्लॉक संवेदनशील, 21 ब्लॉक अर्द्धसंवेदनशील, 37 ब्लॉक सुरक्षित तथा 3 ब्लॉक लवणीय श्रेणी में हैं। इस एक उदाहरण से समझें प्रशासन की सुस्ती
मानसरोवर में अवैध भूजल दोहन कर बॉटल व कैंपर भर कर बेचने के कारोबार को लेकर लोगों ने जलदाय विभाग व प्रशासन को शिकायत की। जलदाय विभाग ने शिकायत को कलेक्टर के पास भिजवा दिया। यहां से शिकायत पीएचईडी के एईएन के पास पहुंची और एईएन ने शिकायत को सांगानेर एसडीएम को भिजवा दिया। सांगानेर एसडीएम ने फिर शिकायत को एक्सईएन को भिजवा दिया। ऐसी ही प्रक्रिया की वजह से धड़ल्ले से भूजल दोहन हो रहा है। भूजल दोहन के लिए एनओसी लेना जरूरी
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के सितंबर 2020 में जारी नोटिफिकेशन के अनुसार कॉमर्शियल व इंडस्ट्रीज में भूजल दोहन के लिए एनओसी जरूरी है। भूजल की निकासी कर रहे हैं तो उसके लिए पर्यावरण कंपनसेशन के रूप में भुगतान करें। सीज करने का नियम, लेकिन कार्रवाई नहीं जयपुर कलेक्टर के मई 2020 के आदेश के अनुसार पेयजल व कृषि के अतिरिक्त कॉमर्शियल या इण्डस्ट्रियल के लिए भूजल दोहन कार्य करते पाए जाने पर केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के निर्देशानुसार अवैध रूप से ड्रिलिंग करने वाली ड्रिलिंग यूनिट को जब्त करने, अवैध बनाए गए ट्यूबवेल को सीज करने या कनेक्शन काटने का नियम है।

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