बरसात के दौरान नदियों में अतिरिक्त जल संचय करेंगे यह राज्य सरकार की महत्त्वाकांक्षी योजना है। झालावाड़, बारां, कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, जयपुर, दौसा, करौली, अलवर, भरतपुर और धौलपुर में पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक गतिविधियों के लिए पानी उपलब्ध कराना इसका उद्देश्य है। दक्षिणी राजस्थान में चंबल, कुन्नू, पार्वती, कालीसिंध और इसकी सहायक नदियों में बरसात के दौरान उपलब्ध अतिरिक्त जल का संचयन किया जाएगा। बजट से कपड़ा बाजार को उम्मीद भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा राज्य बजट से भीलवाड़ा के कपड़ा उद्यमियों को कई उम्मीदें हैं। यहां की प्रमुख मांगों में उद्योगों को पानी उपलब्ध कराना, उत्पादन परिवर्तन, नाम परिवर्तन व भू-रूपांतरण के अधिकार जिला स्तर पर देना शामिल है। आसींद तहसील के मोड़ का निंबाहेड़ा में पूर्व में घोषित सिरेमिक जोन का विकास भी प्रमुख मांगों में है। उद्यमियों को उम्मीद है कि आगामी बजट में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना से भीलवाड़ा को जोड़ने की घोषणा होगी। भीलवाड़ा डार्क जोन घोषित होने के कारण यहां लंबे समय से जल-आधारित उद्योग नहीं लग सके। अहमदाबाद के बाद भीलवाड़ा देश का दूसरा सबसे बड़ा डेनिम फैब्रिक उत्पादन केंद्र है। यहां हर साल 40 करोड़ मीटर डेनिम का उत्पादन हो रहा है। इसमें से 50 प्रतिशत से अधिक डेनिम मेक्सिको, ग्वाटेमाला, कोलंबिया, वेनेजुएला, इक्वाडोर, पेरू, ब्राजील और अर्जेंटीना जैसे देशों को निर्यात किया जाता है। कपड़ा उद्योग को पर्याप्त पानी मिलने से उत्पादन और बढ़ेगा। बेरोजगारों को भी रोजगार मिलेगा। सरकार के स्तर पर लंबित हैं कई आवेदन जिला स्तर पर केवल दो लाख वर्ग मीटर भूमि ही उद्योगों के लिए परिवर्तित की जा सकती है। इससे अधिक भूमि के औद्योगिक उपयोग का अधिकार राज्य सरकार के पास है। इससे भूमि रूपांतरण प्रक्रिया में देरी हो रही है। कई पत्रावलियां राज्य स्तर पर लंबित हैं। उद्यमियों की मांग है कि 60 लाख वर्ग मीटर तक की भूमि के लिए कलेक्टर को अधिकार दिए जाएं। ^औद्योगिक विकास को गति देने के लिए सभी श्रेणी के उद्योगों के लिए कलेक्टर स्तर पर 6 लाख वर्ग मीटर तक भू-आवंटन के अधिकार दिए जाने चाहिए। उत्पाद परिवर्तन की अनुमति का अधिकार भी राज्य स्तर पर राजस्व विभाग के बजाय कलेक्टर को मिलना चाहिए। इस संबंध में चैंबर ने मुख्यमंत्री व वित्तमंत्री को प्रतिवेदन भेजा। आरके जैन, मानद महासचिव मेवाड़ चैंबर बजट से ये भी उम्मीदें वैट छूट योजना 31 दिसंबर 2024 को समाप्त हो चुकी है। उद्यमियों की मांग है कि इसे एक साल के लिए बढ़ाया जाए। बिजली की अधिक दरें औद्योगिक विकास और रोजगार बढ़ाने में बाधा बन रही हैं। दरों की समीक्षा की जानी चाहिए। सरकार ने जुलाई 2024 में घोषणा की थी कि सौर ऊर्जा संयंत्र की क्षमता 200 प्रतिशत तक होगी। सात महीने बाद भी इस घोषणा पर नीति व प्रक्रिया अधिसूचित नहीं हुई। भीलवाड़ा में 55% क्वार्ट्ज व 37 % फेल्सपार जिले में क्वार्ट्ज और फेल्सपार के बड़े भंडार हैं। यहां 55 प्रतिशत क्वार्ट्ज और 37 प्रतिशत फेल्सपार उपलब्ध है। पूर्व वसुंधरा राजे सरकार ने आसींद तहसील में सिरेमिक जोन विकसित करने का निर्णय लिया था। मोड़ का निंबाहेड़ा में 510 हेक्टेयर भूमि इसके लिए आरक्षित की गई थी। सिरेमिक जोन बनने से 5000 करोड़ रुपए का निवेश होगा। 5000 से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा।


