अलवर के जिला अस्पताल में जल्द शुरू होने जा रहा जन औषधि केंद्र अब सिर्फ सस्ती दवाओं का विकल्प नहीं रहेगा, बल्कि यह मरीजों के लिए “वन स्टॉप मेडिसिन सपोर्ट सिस्टम” के रूप में काम करेगा। अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी-2 के सामने स्थान चिन्हित कर दिया है और तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इलाज के खर्च में सीधी कटौती जन औषधि केंद्र शुरू होने से मरीजों को एमआरपी से करीब 50 प्रतिशत तक कम कीमत पर जेनेरिक और ब्रांडेड दवाएं मिलेंगी। इसके साथ ही सर्जिकल आइटम और इंप्लांट्स भी रियायती दरों पर उपलब्ध होंगे। अब तक जो मरीज बाहर की मेडिकल दुकानों पर महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर थे, उन्हें अस्पताल परिसर में ही सस्ता विकल्प मिलेगा। दवा के लिए भटकना नहीं पड़ेगा अस्पताल के कंट्रोलर डॉ. विजय चौधरी के अनुसार, जिन दवाओं की उपलब्धता जिला अस्पताल में नहीं होती, वे भी जन औषधि केंद्र पर कम दरों में मिल सकेंगी। इससे मरीजों को अलग-अलग दुकानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और इलाज में देरी भी नहीं होगी। राज्य सरकार की पहल का असर राज्य सरकार ने राजस्थान मेडिकल एजुकेशन सोसायटी (राजमेस) के अधीन सभी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में जन औषधि केंद्र खोलने के निर्देश जारी किए हैं। इसी क्रम में अलवर मेडिकल कॉलेज से संबद्ध सामान्य अस्पताल में भी स्थान तय किया गया है। सरकारी आदेश के अनुसार, संभाग स्तरीय मेडिकल कॉलेजों से जुड़े मुख्य अस्पतालों में 2000 से 3000 वर्ग फीट तथा अन्य मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में लगभग 300 वर्ग फीट क्षेत्र जन औषधि केंद्र के लिए निर्धारित किया जाना है। हजारों मरीजों को सीधा लाभ अलवर जैसे बड़े जिले में रोजाना हजारों मरीज ओपीडी में पहुंचते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सस्ती दवाओं की उपलब्धता से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सबसे ज्यादा राहत मिलेगी। इलाज का खर्च कम होने से मरीज नियमित दवा ले सकेंगे, जिससे स्वास्थ्य परिणाम भी बेहतर होंगे।


