गुना कोतवाली के थाना प्रभारी चंद्रप्रकाश सिंह चौहान को निलंबित करने और विभागीय जांच बैठाने के सिंगल बेंच के आदेश को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने बरकरार रखा है। अक्टूबर में दर्ज एक FIR में कार्रवाई को लेकर युवती ने हाई कोर्ट में रिट लगाई थी, जिसके बाद सिंगल बेंच ने 30 जनवरी को सस्पेंशन के निर्देश दिए थे। TI ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन डबल बेंच ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। एफआईआर से शुरू हुआ पूरा विवाद मामला कोतवाली थाने में अक्टूबर महीने में दर्ज एक FIR से जुड़ा है। एक युवती ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके अश्लील फोटो वायरल किए गए। इस मामले में आरोपी महिला ने पहले जिला अदालत में अग्रिम जमानत मांगी, लेकिन आवेदन खारिज हो गया। बाद में हाई कोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिली। जमानत खारिज, फिर भी नोटिस देकर छोड़ा ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत खारिज होने के बाद भी थाना प्रभारी ने आरोपी महिला को गिरफ्तार करने की बजाय नोटिस तामील कर छोड़ दिया। नियम के अनुसार सात साल तक की सजा वाले मामलों में नोटिस देकर छोड़ा जा सकता है, लेकिन पीड़िता ने आरोप लगाया कि जानबूझकर गिरफ्तारी नहीं की गई। युवती पहुंची हाई कोर्ट कार्रवाई से असंतुष्ट पीड़ित युवती ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में कहा गया कि आरोपी को पुलिस संरक्षण मिल रहा है। गुना SP, कोतवाली TI और आरोपी महिला को पक्षकार बनाया गया। सिंगल बेंच का सख्त रुख सुनवाई के बाद कोर्ट ने 28 जनवरी को फैसला सुरक्षित रखा और 30 जनवरी को आदेश सुनाते हुए TI को निलंबित करने तथा विभागीय जांच शुरू करने के निर्देश दे दिए। कोर्ट ने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए यह जरूरी है। सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ TI ने डबल बेंच में अपील दायर की। 9 फरवरी को सुनवाई हुई और फैसला सुरक्षित रख लिया गया। डबल बेंच ने क्या कहा डबल बेंच ने माना कि रिट कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अपने अधिकारों का सही इस्तेमाल किया है। आदेश में किसी तरह की त्रुटि नहीं है, इसलिए उसमें दखल देने की जरूरत नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अक्सर जांच अधिकारी कानून व्यवस्था या दूसरे कामों में ज्यादा रुचि लेते हैं और अपराध की जांच में ढिलाई बरतते हैं। इससे पीड़ितों को बार-बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है। TI को मिलेगा सुनवाई का मौका डबल बेंच ने स्पष्ट किया कि विभागीय जांच के दौरान अधिकारी को अपना पक्ष रखने और निर्दोष साबित करने का पूरा अवसर मिलेगा। सक्षम प्राधिकारी साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेगा। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि जांच में देरी नहीं होनी चाहिए और आगे किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी के साथ सिंगल बेंच का आदेश यथावत रखा गया।


