छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के बोराई सिविल अस्पताल में आपातकालीन इलाज नहीं मिलने के कारण एक घायल व्यक्ति की मौत हो गई। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने देर रात अस्पताल के बाहर धरना प्रदर्शन किया। दरअसल, रविवार रात बोराई-घुटकेल मार्ग पर सड़क हादसे में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर पड़ा था। सूचना मिलने पर बोराई पुलिस और ग्रामीण मौके पर पहुंचे। घायल को बोराई सिविल अस्पताल ले गए। अस्पताल से डॉक्टर नर्स मिले गायब हालांकि, अस्पताल में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं ठप मिलीं। वहां न कोई डॉक्टर मौजूद था, न स्टाफ नर्स और न ही कोई अन्य कर्मचारी। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों को फोन पर सूचना दी, लेकिन घायल को समय पर इलाज नहीं मिल सका और उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद बोराई क्षेत्र के ग्रामीण आक्रोशित हो गए और अस्पताल के मुख्य द्वार पर धरना देकर विरोध प्रदर्शन करने लगे। ग्रामीणों का आरोप है कि, यदि समय पर इलाज मिलता तो घायल की जान बच सकती थी। क्या इमरजेंसी सेवा सिर्फ कागजों में चलती है? पूर्व जिला पंचायत सदस्य मनोज साक्षी ने कहा कि, जब सिविल अस्पताल में ही डॉक्टर नहीं मिलेंगे तो आम जनता कहां जाएगी? क्या यहां इमरजेंसी सेवा सिर्फ कागजों में चलती है? उन्होंने यह भी कहा कि बोराई इलाके को सिविल अस्पताल का दर्जा मिला है, लेकिन सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बराबर भी नहीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से बनी हुई है। उनका कहना है कि कई बार ज्ञापन और आंदोलन के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक अस्पताल में 24 घंटे डॉक्टरों की तैनाती और उनकी जवाबदेही तय नहीं की जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी- कलेक्टर इस मामले में कलेक्टर अविनाश मिश्रा ने कहा कि जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।


