वकील को गोली मारकर हत्या का मामला:परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग; 7 मांगों को लेकर बार एसोसिएशन का प्रदर्शन

शिवपुरी के करैरा में वकील की हत्या के बाद बार एसोसिएशन ने सोमवार को प्रदर्शन किया। उनके परिवार को सुरक्षा देने की मांग की है। वकीलों ने परिवार को आर्थिक सहायता, 7 दिन के भीतर एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने समेत 7 मांगें की हैं। इनमें करैरा कोर्ट में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था और गार्ड की तैनाती, वकीलों के लिए सुरक्षित चैंबर की व्यवस्था, मेन रोड से कोर्ट तक सीसीटीवी कैमरे लगाने, कोर्ट टाइमिंग्स में ट्रैफिक, हेल्पलाइन वाहन उपलब्ध कराने और मामले में बाकी आरोपियों की गिरफ्तारी शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर मांगे पूरी नहीं हुई तो 20 फरवरी तक कोर्ट बंद रखेंगे। वकील गिरीश गोयल ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो 20 फरवरी तक करैरा कोर्ट में यह प्रदर्शन जारी रहेगा और कामकाज बंद रहेगा। वहीं, एडवोकेट प्रशांत त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि पुलिस अधीक्षक ने शनिवार को एसएएफ गार्ड तैनात करने की बात कही गई थी, लेकिन सोमवार को न्यायालय परिसर में कोई गार्ड मौजूद नहीं था। वकील संजय को मारी थी गोली
सीनियर एडवोकेट संजय सक्सेना की 14 फरवरी की सुबह करीब 11:30 बजे कोर्ट आते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बार एसोसिएशन ने इस जघन्य हत्याकांड की कड़ी निंदा की है। संघ ने मांग की है कि दिवंगत वकील के परिवार को फौरन सुरक्षा दी जाए और साथ ही आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाए। दिवंगत वकील को श्रद्धांजलि देने शोकसभा
शिवपुरी जिला मुख्यालय पर भी वकीलों ने एकजुट होकर कामकाज बंद रखा। न्यायालय परिसर में दिवंगत वकील को श्रद्धांजलि देने के लिए शोकसभा आयोजित की। इसके बाद, वकालों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें प्रदेशव्यापी हड़ताल का समर्थन किया गया। अधिवक्ताओं ने मांग की कि मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को शासकीय नौकरी दी जाए। साथ ही जिले के सभी न्यायालयों में पुलिस सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और प्रदेश में तत्काल एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट लागू किया जाए। बार पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन प्रदेश स्तर पर आयोजित है और शिवपुरी जिले में भी सख्ती से लागू किया जा रहा है। यदि कोई अधिवक्ता हड़ताल के दौरान कार्य करता पाया गया तो उसके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सोमवार को करैरा से लेकर शिवपुरी मुख्यालय तक अधिवक्ताओं के आक्रोश और एकजुटता ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। अब देखना होगा कि शासन-प्रशासन अधिवक्ताओं की मांगों पर क्या निर्णय लेता है।

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