सागर में वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में एक महीने पहले लाए गए करीब 35 माह उम्र के बाघ की मौत हो गई। रविवार को मानेगांव बीट में उसका शव मिला। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अंधेरा होने के कारण विस्तृत सर्चिंग नहीं हो सकी, जिसके बाद सोमवार सुबह डॉग स्क्वॉड के साथ जांच तेज की गई। डॉक्टरों की पैनल पोस्टमार्टम कर रही है, जिससे मौत का कारण स्पष्ट होगा। शुरुआती तौर पर टेरिटरी फाइट की आशंका जताई जा रही है। मानेगांव बीट में मिला शव टाइगर रिजर्व की मुहली रेंज के कोर एरिया में बाघ की निगरानी की जा रही थी। रविवार को टीम जब मौके पर पहुंची तो बाघ जमीन पर पड़ा मिला। पास जाकर देखने पर उसकी मौत की पुष्टि हुई। तीन दिन से एक ही लोकेशन कॉलर आईडी से मूवमेंट ट्रैक किया जा रहा था। पिछले तीन दिनों से बाघ की लोकेशन एक ही स्थान पर मिल रही थी। इससे संदेह गहराया और टीम सर्चिंग के लिए पहुंची, जहां शव बरामद हुआ। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बाद सोमवार को आसपास के इलाके में डॉग स्क्वॉड से सर्च कराया गया। घटनास्थल पर दूसरे वन्यजीव के पगमार्क मिलने की बात भी सामने आई है। करंट या जहर के संकेत नहीं जांच के दौरान बिजली के तारों और आसपास के जलस्रोतों को भी परखा गया। कहीं करंट या पानी में गड़बड़ी जैसे संकेत नहीं मिले। इससे विभाग का शक टेरिटरी फाइट की ओर ज्यादा बढ़ा है। डीएफओ रजनीश कुमार के अनुसार शव का पोस्टमार्टम विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम कर रही है, जो पन्ना टाइगर रिजर्व, भोपाल और जबलपुर से पहुंची है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। 18 जनवरी को हुआ था शिफ्ट इस बाघ को 18 जनवरी को कान्हा टाइगर रिजर्व से यहां लाया गया था। उसे कोर एरिया में छोड़कर कॉलर आईडी के जरिए लगातार मॉनिटर किया जा रहा था। प्रबंधन के मुताबिक अप्रैल 2023 में यह शावक अपनी मां से अलग हो गया था। बाद में उसे सुरक्षित रखकर विशेष बाड़े में पाला गया और शिकार की ट्रेनिंग दी गई। लंबी ट्रेनिंग के बाद जंगल में छोड़ा करीब 35 महीने की रिवाइल्डिंग के बाद वह खुद शिकार करने में सक्षम हुआ। इसके बाद उसे नए टाइगर रिजर्व में बसाने की प्रक्रिया के तहत यहां शिफ्ट किया गया था। वन विभाग का कहना है कि फिलहाल सभी पहलुओं पर जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मौत प्राकृतिक संघर्ष से हुई या कोई अन्य कारण जिम्मेदार है।


