श्योपुर जिले के पटवारियों ने अपनी कई लंबित मांगों को लेकर प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे 18 फरवरी से सामूहिक अवकाश और अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल पर चले जाएंगे। जिला पटवारी संघ ने सोमवार को इस संबंध में एक ज्ञापन कलेक्टर के नाम पर डिप्टी कलेक्टर संजय जैन को सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संघ ने ज्ञापन में बताया कि फार्मर रजिस्ट्री आईडी के लंबित अप्रूवल के कारण किसानों की अन्य भूमि रिकॉर्ड में नहीं जुड़ पा रही है। इससे किसानों को खाद सहित अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कठिनाई हो रही है। पटवारियों ने अधिकारी स्तर पर लंबित सभी फार्मर रजिस्ट्री प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने की मांग की है, ताकि उन पर अनावश्यक कार्य का दबाव कम हो सके। पटवारी संघ ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत अतिक्रमणकारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है, जो पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने वसूली के लिए पटवारियों पर अतिरिक्त दबाव न बनाने का आग्रह किया है। इसके अतिरिक्त, लंबित समयमान वेतनमान प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण करने की मांग की गई है। पटवारियों ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के अधिकांश कार्य अब अधिकारी लॉगिन से संचालित होते हैं। इसके बावजूद, इन योजनाओं से संबंधित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के निराकरण का दबाव पटवारियों पर बनाया जाता है, जिसे वे अनुचित मानते हैं। संघ ने त्वरित गूगल मीट के बार-बार आयोजन पर भी आपत्ति जताई है, जिससे संवाद की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने मांग की है कि समीक्षा बैठकें पूर्व निर्धारित समय पर और यथासंभव प्रत्यक्ष रूप से आयोजित की जाएं। पटवारियों ने अवकाश के दिनों में कार्य का दबाव न बनाने और एक से अधिक हल्कों में कार्यरत पटवारियों को अतिरिक्त समय देने की भी मांग की है। ज्यादा काम का दबाव बना रहे संघ ने पिछले चार महीनों में पटवारियों द्वारा किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया। इनमें खरीफ व रबी गिरदावरी, फार्मर आईडी जेनरेशन, अतिवृष्टि मुआवजा वितरण, विधानसभा प्रश्नों की तैयारी, विशेष गहन पुनरीक्षण, सीमांकन, अवैध कॉलोनी रिपोर्ट, राजस्व वसूली, टीएल, सिंचाई संगणना और परीक्षाओं में कलेक्टर प्रतिनिधि जैसे अनेक महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। पटवारियों का कहना है कि इन सभी कार्यों के बावजूद उन पर अत्यधिक कार्य का दबाव बनाया जा रहा है।


