क्रिसमस और नए साल पर पड़ेगी कड़ाके की ठंड:हवा की रफ्तार धीमी होने से पारे में आया हल्का उछाल, वातावरण में ठिठुरन बरकरार

सर्दी के मौसम में इस साल जनवरी से ज्यादा ठंडा दिसंबर है। शीतलहर के चलते कड़ाके की सर्दी का दौर जारी है। ठिठुरा देने वाली ठंड से रात के साथ दिन में भी लोग कंपकपा रहे हैं। तापमान में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। इस सीजन में सागर का न्यूनतम पारा सबसे कम 6 डिग्री तक पहुंच चुका है। लेकिन पिछले दो दिनों से हवाओं की रफ्तार धीमी होने से पारे में हल्का उछाल आया है। हालांकि रात के साथ दिन में भी ठिठुरन है। सर्दी से बचने के लिए लोग शाम ढलते ही अलाव का सहारा ले रहे हैं। मंगलवार को सुबह से सागर का मौसम साफ रहा। हवा में ठंडक रही। लोग गर्म कपड़े पहनकर घरों से बाजार के लिए निकले। इस दौरान अधिकतम तापमान 27.2 डिग्री और न्यूनतम पारा 9.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, क्रिसमस 25 दिसंबर से सर्दी का पीक शुरू होगा। 31 जनवरी तक कड़ाके की सर्दी का दौर चलेगा। कड़ाके की ठंड पड़ने का कारण जेट स्ट्रीम है। यह जमीन से लगभग 12.6 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार अभी 240 किमी प्रतिघंटा तक है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है। पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ा रही है। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों में बर्फीली हवा हमारे यहां आती हैं तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही हो रहा है। ठंड से बचाओ के लिए एडवाइजरी
जिले में अचानक बढ़ी ठंड और शीतलहर को देखते हुए सर्दी से होने वाले दुष्प्रभाव और बचाओ को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ममता तिमोरी ने एडवाइजरी जारी की है। उन्होंने बताया कि ठंड के मौसम में वातावरण का तापमान अत्याधिक कम होने से सर्दी, जुकाम, बुखार, निमोनिया, त्वचा रोग, फेफड़ों में संक्रमण, हाइपोथर्मिया, अस्थमा, एलर्जी होने की आशंका बढ़ जाती है। यदि समय पर नियंत्रण न किया जाए तो स्थिति गंभीर भी हो सकती है। प्रभावों से पूर्व बचाव के लिए समय अनुसार उचित कार्रवाई की जाने की स्थिति में प्राकृतिक विपदा का सामना किया जा सकता है। ठंड से बचने के लिए आवश्यक होने पर ही घर से बाहर निकले। शीतलहर में दीर्घकालिक बीमारियां जैसे-डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, श्वांस संबंधी बीमारियों वाले मरीज, वृद्धजन, 5 साल से कम आयु के बच्चे, गर्भवती महिलाएं आदि को विशेष देखभाल की आवश्यकता होती हैं। शीत घात के दौरान शरीर को सूखा रखें। शरीर के गरमाहट बनाए रखने के लिए अपने सिर, गर्दन, कान, नाक, हाथ, पैर की उंगलियों को पर्याप्त रूप से ढक कर रखें। शरीर को गर्म बनाए रखने के लिए टोपी, मफलर, जल रोधी जूतों को उपयोग करें, स्वास्थ्य वर्धक गर्म भोजन को सेवन करें। शीत प्रकृति के भोजन से दूर रहें। विटामिन सी से भरपूर ताजे फल खाएं। गर्म तरल पदार्थ नियमित रूप से पिएं। बुजुर्ग, नवजात शिशुओं और बच्चों का ध्यान रखें। जरूरत पड़ने पर तत्काल चिकित्सक की सलाह लें।

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