प्रदेश की सरकारी स्कूलों के जर्जर भवन और क्लासरूम की मरम्मत के लिए गए प्रावधान की जानकारी आज सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दी गई। सरकार की ओर से कहा गया कि इस बजट में मरम्मत के लिए 550, नए भवन के लिए 450 और स्कूल लेब के लिए 200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया हैं। इस पर जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान हैं। बता दे कि पिछली सुनवाई पर शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया था कि प्रदेश की सरकारी स्कूलों की मरम्मत के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता हैं। इस पर अदालत ने कहा कि 20 हजार करोड़ रुपए की आवश्यकता है और आप 2 हजार करोड़ रुपए भी नहीं जुटा पाएं हैं। क्या टैंडर जारी करने पर रोक लगा दे
बैंच ने सरकार से कहा कि जो राशि बजट में दी गई है, वो काफी कम है। सरकार को सीएसआर और भामाशाहों से भी राशि जुटाने की व्यवस्था करनी चाहिए। लेकिन जो राशि एकत्रित की जाती है, वो तो इधर-उधर के कामों में लगा दी जाती हैं। ऐसे में क्या हम केवल अर्जेंट टैंडर को छोड़कर अन्य टैंडर जारी करने पर रोक लगा दे। जिससे राशि जरूरी कामों में ही खर्च हो सके। मॉनिटरिंग के लिए कमेटी बननी चाहिए
अदालत ने कहा कि स्कूलों की मरम्मत के लिए जारी राशि सही मद में खर्च हो, इसके लिए हम कमेटी बनाने पर विचार कर रहे है। इस कमेटी में कौन-कौन शामिल हो और अतिरिक्त फंड की व्यवस्था किस तरह से की जाए। इसके लिए कोर्ट ने सभी पक्षों से सुझाव मांगे हैं। अब 5 मार्च को मामले की सुनवाई होगी। दरअसल झालावाड़ स्कूल हादसे के बाद हाईकोर्ट स्कूलों के जर्जर भवन और क्लासरूम को लेकर स्वप्रेरित प्रसंज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा हैं।


