बिलासपुर में गांजा तस्कर से अवैध उगाही करने वाले हेडकांस्टेबल और सिपाही को एसएसपी रजनेश सिंह ने सस्पेंड कर दिया है। हवलदार ने 500 ग्राम गांजा के साथ तस्कर के नाबालिग बेटे को पकड़ा था, जिसके बाद 80 हजार रुपए लेकर मामले को रफादफा कर दिया गया। गांजा जब्त करने और तस्कर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने से नाराज एसएसपी ने टीआई को फटकार लगाते हुए जवाब मांगा है। पूरा मामला कोटा थाना क्षेत्र का है। दरअसल, एसएसपी रजनेश सिंह ने सभी थाना प्रभारियों को नशे का सामान बेचने वालों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जिस पर कोटा पुलिस की टीम भी गांजा तस्करों को पकड़ने गई थी। इस दौरान रानीसागर गांव में एक गांजा व्यापारी के घर में दबिश दी गई। लेकिन, तस्कर फरार हो गया। उसके घर की तलाशी लेने पर पुलिस को गांजा का पौधा और करीब 300 ग्राम गांजा बरामद हुआ। 13 साल के बेटे को पकड़कर ले आई पुलिस
इस दौरान पुलिस की टीम गांजा तस्कर के 13 साल के बेटे को पकड़ कर थाने ले आई। नाबालिग को देखकर टीआई नरेश चौहान ने उसे पकड़ने का कारण पूछा, जिसके बाद उन्होंने नाबालिग को छोड़कर उसके पिता को पकड़ने के निर्देश दिए। बेटे को छोड़ने के बहाने अवैध वसूली
बताया जा रहा है कि टीआई के कहने पर हवलदार प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर ने नाबालिग बच्चे को छोड़ दिया। लेकिन, इस बहाने उन्होंने तस्कर के परिवारवालों से अवैध वसूली कर ली। आरोप है कि उन्होंने 80 हजार रुपए लिया है। वहीं, टीआई नरेश चौहान का कहना है कि उन्हें अवैध लेनदेन की जानकारी नहीं है। गांजा तस्कर की पुलिस की टीम तलाश कर रही है। एसएसपी ने हवलदार और आरक्षक को किया सस्पेंड, टीआई से मांगा जवाब
इधर, गांजा जब्ती के मामले में लेनदेन की जानकारी एसएसपी रजनेश सिंह को मिली, तब उन्होंने टीआई नरेश चौहान से पूछताछ की। उन्होंने सफाई देते हुए नाबालिग बच्चे को छोड़ने की बात कही। साथ ही पैसे के लेनदेन से इंकार किया। एसएसपी रजनेश सिंह ने टीआई को कड़ी फटकार लगाते हुए हेडकांस्टेबल प्रकाश दुबे और आरक्षक सोमेश्वर को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही टीआई को जवाब देने के लिए कहा है। पुलिस अफसरों की भूमिका पर सवाल
एसएसपी रजनेश सिंह ने जिले के सभी पुलिस अफसरों और थाना प्रभारियों को नशे का सामान बेचने वालों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। जिस पर पुलिस लगातार कार्रवाई भी कर रही है। लेकिन, कई मामलों में लेनदेन की शिकायतें भी मिलती है। ऐसे में सुपरविजन करने वाले पुलिस अफसरों की कार्यप्रणाली और भूमिका पर भी सवाल उठ रहा है।


