दुर्ग जिले में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के अंदर चार साल पहले हुई हत्या के मामले में अदालत ने फैसला सुना दिया है। अष्टम अपर सत्र न्यायाधीश पी.एस. मरकाम की अदालत ने आरोपी आर. व्यंकटेश्वर राव उर्फ आर. वेंकट राव (34) को हत्या, लूट और साक्ष्य मिटाने का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह घटना 21 जुलाई 2021 को हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, उधार के पैसों को लेकर हुए विवाद में आरोपी ने अपने दोस्त की हत्या कर दी थी। अभियोजन के मुताबिक, आरोपी ने मृतक जगतराम उइके को उधार ली गई रकम लौटाने के बहाने बीएसपी प्लांट के एसएमएस-2, सीसीएस 6.5 मीटर स्थित क्रास्टर-6 ग्रीस स्टेशन के पास बुलाया था। जगतराम उइके 19 जुलाई 2021 को अपने घर से आर. वेंकट से मिलने की बात कहकर निकले थे। देर रात तक घर नहीं लौटने पर उनके बेटे ऋषभ उइके ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। दो दिन बाद, 21 जुलाई को प्लांट परिसर में जगतराम की बलेनो कार लावारिस हालत में पाई गई। उसी दिन, ग्रीस स्टेशन के एक बंद प्लेटफॉर्म के भीतर से एक सड़ी-गली हालत में शव बरामद हुआ, जिसकी पहचान बाद में जगतराम उइके के रूप में हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि मृतक के सिर पर गंभीर चोटें थीं और उसकी मौत हत्या के कारण हुई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी ने बातचीत के दौरान जगतराम को ग्रीस स्टेशन के कमरे में ले जाकर लोहे की रॉड से सिर पर वार कर हत्या कर दी। हत्या के बाद, आरोपी ने शव को ड्राईव साइड प्लेटफॉर्म में छिपा दिया और बाहर से दरवाजा बंद कर दिया था। जांच के दौरान, पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया। उसके मेमोरेण्डम कथन के आधार पर, पुलिस ने घटना में प्रयुक्त लोहे की रॉड, मृतक की तीन सोने की अंगूठियां और गले की सोने की चैन आरोपी के घर से बरामद कीं। अदालत ने अपने निर्णय में उल्लेख किया कि मृतक के शरीर से गायब जेवर आरोपी के घर से मिलना एक मजबूत परिस्थितिजन्य साक्ष्य है। आरोपी इस संबंध में कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका। आखिरी बार साथ देखा गया
साक्षी हरिप्रसाद यादव सहित अन्य गवाहों ने अदालत में बयान दिया कि घटना के दिन मृतक और आरोपी को साथ देखा गया था। अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी को पूर्ण और विश्वसनीय मानते हुए कहा कि यह सिद्ध होता है कि आरोपी ने जानबूझकर हत्या कर शव छिपाया और जेवरात अपने कब्जे में रखे। अदालत की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने कहा कि हत्या जैसा जघन्य अपराध करने वाले आरोपी को परिवीक्षा का लाभ नहीं दिया जा सकता। दंड के प्रश्न पर बचाव पक्ष ने आरोपी के प्रथम अपराधी होने और चार वर्ष से न्यायिक हिरासत में रहने का हवाला देकर नरमी की मांग की, लेकिन अदालत ने अपराध की गंभीरता को प्राथमिकता दी। उम्रकैद और जुर्माना
अदालत ने आरोपी को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास, धारा 404 और 201 के तहत 2-2 वर्ष के सश्रम कारावास तथा प्रत्येक धारा में 500-500 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया। जुर्माना अदा न करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। फैसले के बाद आरोपी को सजा वारंट के तहत जेल भेजने का आदेश दिया गया।


