राजस्थान क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि राजस्थान में गोल्डमैन के नाम से जाने जाने वाले वकील नारायणसिंह की नेनो कार मेगा हाईवे पर जली हुई मिली। कार से करीब 5 किमी दूर कुएं में उनका शव मिला था। नारायणसिंह किसी का फोन आने के बाद एक किलो से ज्यादा सोने के गहने पहनकर अपने घर से निकले थे। ऐसे में पुलिस ने नाराणसिंह हत्याकांड की इंवेस्टिगेशन उनके घर से निकलने से ही शुरू की। बेटे ने बताया कि पार्टी का फोन आया था नारायणसिंह के बेटे सतपाल ने बताया कि 27 मई को करीब डेढ़ बजे उनके पिता नारायणसिंह के पास किसी पार्टी का फोन आया था। इसके बाद वह अपने गहने पहन कर तैयार हो गए थे। शाम तक घर लौट आने की बात कहकर निकल गए थे। उनके पिता ने सिर्फ पार्टी से मिलकर आने का जिक्र किया था। किसी का नाम नहीं बताया था। रात तक वह नहीं लौटे तो बिलाड़ा थाने में उनकी मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करवाई। पुलिस को पहली लीड नारायणसिंह की पत्नी लीला देवी व बेटी निर्मला ने दी। दोनों ने बताया कि जब नारायणसिंह गहने पहन कार लेकर घर से निकले थे तो उनके पीछे बाइक लेकर बिलाड़ा में रहने वाले उमेश सोनी और प्रभु कुमावत बाइक पर निकले थे। मामले में बिलाड़ा निवासी उमेश सोनी पुत्र माणकचंद, बिलाड़ा के हांगरों की ढीमड़ी निवासी प्रभु पटेल पुत्र बगदाराम कुमावत और उनके साथी हर्ष गांव निवासी अर्जुन देवासी पुत्र त्रिलोक राम बिलाड़ा से पूछताछ की। तीनों ने हत्या करना, उसकी कार जलाना और लाश को कुएं में फेंकना कबूल कर लिया। सेल्फी के बाद ढाई हजार देने का लालच दिया नारायणसिंह के गहनों को लूटने की प्लानिंग इन लोगों ने काफी दिनों पहले से शुरू कर दी थी। लाखों के गहने पहनने वाले नारायणसिंह अपने गहनों के साथ सेल्फी खिंचवाने के लिए 2 हजार रुपए चार्ज करते थे। ऐसे में इन लोगों ने नारायणसिंह की हत्या की प्लानिंग तैयार कर दी थी। इसके लिए उमेश और प्रभु ने नारायणसिंह से कहा कि बाहर से उनका एक दोस्त आया है। सेल्फी के बदले वो ढाई हजार रुपए देने का तैयार है। इसपर नारायणसिंह तैयार हो गए। कार में बैठकर बीयर पिलाई, फिर गला घोंटा नारायणसिंह कार में घर से अकेले निकले थे। आगे जाकर उमेश सोनी, प्रभु पटेल और अर्जुन देवासी कार में सवार हो गए। अडबड़ा मार्ग के पास शराब के ठेके से उमेश से चार बीयर खरीदी। इसके बाद उमेश कार चलाने लगा। नारायणसिंह उमेश के बगल वाली सीट पर बैठ गए। प्रभु व अर्जुन दोनों पीछे की सीट पर बैठ गए और बीयर पीना शुरू कर दिया। बीयर पीते हुए वह लोग बिलाड़ा से करीब 10 किलोमीटर आगे निकल गए थे। इस दौरान सभी बातों में व्यस्त थे। तभी नारायणसिंह की सीट के पीछे बैठे एक आरोपी ने गमछे से उनका गला दबा दिया। वहीं, अन्य दो आरोपियों ने उनके हाथों को पकड़ दिया। नारायणसिंह के दम तोड़ने के बाद तीनों ने सभी गहने उतारकर एक थैले में भर लिए। लाश को कुएं में फेंका, फिर कार को लगाई आग नारायणसिंह की हत्या के बाद आरोपियों ने उनकी कार व शव सुनसान झाड़ियों में छिपा दिया। प्रभु और उमेश ने अर्जुन देवासी को शव और कार की निगरानी रखने के लिए वहीं छोड़ दिया। कार में पेट्रोल कम था। उमेश ने एक इंडिका कार मंगवाई और प्रभु के साथ पेट्रोल लाने के लिए चला गया। चार घंटे बाद दोनों 5 लीटर पेट्रोल लेकर वापस आए। चार लीटर पेट्रोल नारायणसिंह की कार में डाला। एक लीटर पेट्रोल बोतल में ही रखा। तीनों आरोपी नारायणसिंह की लाश और कार को लेकर शाम को 7:30 बजे छितरिया गांव के पास एक कुएं पर पहुंचे। वहां तीनों ने नारायणसिंह के शव को कुएं में फेंक दिया। इसके बाद चांवडिया-आगेवा सरहद मेगा हाईवे पर पहुंचे। रात को 8:30 बजे बोतल में बचे पेट्रोल को कार पर छिड़क दिया और आग लगा दी। अचानक कार में उठी आग की लपटों के कारण अर्जुन देवासी भी झुलस गया। उमेश और प्रभु ने अर्जुन को दवा दिलाकर घर छोड़ा और गहने लेकर चले गए। अर्जुन का चेहरा और हाथ जल गए थे पुलिस ने जब अर्जुन को पकड़ा था तो उसका चेहरा व हाथ जले हुए थे। पूछताछ में उसने बताया कि उसने केन में भरे पेट्रोल को कार पर छिड़कर आग लगाई थी। अचानक से कार में धधकी आग की चपेट में वह भी आ गया था। उसका चेहरा व हाथ दोनों जल गए थे। कार को जलाने के बाद उमेश, प्रभुलाल व अर्जुनराम ने मेडिकल से क्रीम खरीदी थी। पुलिस ने वहां के सीसीटीवी कैमरों को भी अपने साक्ष्य में शामिल किया। पुलिस ने बताया कि नारायणसिंह की हत्या के तीनों आरोपियों को पैसों की जरूरत थी। सबसे ज्यादा हालात अर्जुन के खराब थे। उसके पास एक समय के खाने के लिए आटा भी नहीं था। नारायणसिंह की हत्या करने के बाद उमेश और प्रभु गहने लेकर निकल गए थे। इससे पहले दोनों ने अर्जुन को 5 किलो गेहूं का आटा दिलवाया था। दो दिन से फार्म हाउस पर बनाई जा रही थी प्लानिंग नारायणसिंह की हत्या करने के बाद उमेश ने सभी गहनों को ज्वेलर्स को बेचकर पैसा लाने का जिम्मा उठाया था। उमेश से नारायणसिंह का 940 ग्राम वजनी हार बिलाड़ा में एक ज्वेलर्स को बेच दिया था। बचे हुए गहनों को अपने घर के बाड़े में छिपा दिया था। पुलिस ने सभी गहनों को उमेश के पत्नी की मौजूदगी में उसके बाड़े से बरामद कर किया था। पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन करते हुए उमेश के फार्म हाउस और उसके आस-पास रहने वाले लोगों से भी जानकारी जुटाई। सामने आया कि तीनों आरोपी हत्या से पहले दो तीन दिन से फार्म हाउस में ही मिल रहे थे और पार्टी कर रहे थे। पूछताछ करने पर तीनों कबूल किया कि हत्या से दो दिन पहले तीनों ने नारायणसिंह की हत्या करने का प्लान उमेश के फार्म हाउस पर बना दिया था। तीनों में कौन क्या करने वाला था। यह सभी पहले से तय कर दिया गया था। तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा 14 नवंबर 2024 को सोजत एडीजे कोर्ट ने नाराणसिंह सीरवी हत्याकांड मामले में अपना फैसला सुनाया था। इसके तहत हत्या के आरोपी उमेश सोनी, प्रभुलाल व अर्जुनराम को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों आरोपियों पर 50-50 हजार रुपए जुर्माना लगाया। पुलिस ने नारायणसिंह की ज्वेलरी खरीदने वाले धर्मेंद्र सोनी को भी गिरफ्तार किया था। संदेह का लाभ देते हुए कोर्ट ने धर्मेंद्र सोनी को बरी कर दिया था। ….. राजस्थान के गोल्डमैन की हत्या का पहला पार्ट भी पढ़िए… गोल्डमैन का मर्डर, जो पहनता था 1 किलो सोना:5 साल पहले हाईवे पर मिली थी जली हुई कार, सूखे कुएं में लाश, पार्ट-1 राजस्थान क्राइम फाइल में इस बार कहानी राजस्थान के नारायणसिंह राठौड़ के मर्डर की। पेशे से वकील नारायणसिंह को लोग गोल्डनमैन कहते थे। पूरी खबर पढ़िए…


