छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती:रायपुर में भगवा ध्वज और मशाल लेकर निकाली रैली,कहा-शिवाजी ने संघर्ष और नीतियों से समाज को नई दिशा दी

रायपुर में बुधवार को छत्रपति शिवाजी महाराज की 395वीं जयंती बड़े ही उत्साह के साथ मनाई गई। इस दौरान तात्यापारा चौक स्थित शिवाजी की प्रतिमा पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मराठा मित्र मंडल के लोगों ने शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर मशाल आरती की। इस दौरान पीले रंग का गुलाल उड़ाया गया और आतिशबाजी की गई। जिस समय गुलाल उड़ाया जा रहा था, यह दृश्य देखकर ऐसा लग रहा था मानों शिवाजी युद्ध रण में जा रहे हो। इस दौरान बड़ी संख्या में महिला, बच्चे और युवा मौजूद रहे। मशाल हाथ में लेकर दौड़े युवा मराठा मित्र मंडल के बुधवार को संतोषी नगर के वीर शिवाजी चौक से बाइक रैली की शुरुआत की। रैली की शुरुआत में शिवाजी की प्रतिमा की पूजन और मशाल आरती की गई। बाइक रैली वीर शिवाजी चौक से निकली। इस दौरान बाइक रैली के आगे युवा बारी-बारी से मशाल हाथ में लिए दौड़ते रहे। साथ ही, भगवा ध्वज और छत्रपति महाराज का ध्वज थामे युवाओं की टोली ने ‘जय भवानी, जय शिवराय’ का नारा लगाया। रैली कालीबाड़ी, बिजली ऑफिस चौक के बाद बूढापारा, पुरानी बस्ती, आमापारा, आजाद स्थानों से गुजरते हुए छत्रपति शिवाजी महाराज प्रतिमा स्थल तात्यापारा पहुंची और रैली का समापन हुआ। कुनबी समाज संगठन द्वारा निकाली गई भव्य शोभायात्रा छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के अवसर पर शहर के अलग-अलग समाज की ओर से कार्यक्रम आयोजित किए गए। कोटा क्षेत्र में कुनबी समाज संगठन द्वारा भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस मौके पर समाज के सैकड़ों लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए और ढोल-ताशों के साथ नगर भ्रमण किया। शोभायात्रा की शुरुआत कोटा के सामाजिक भवन से हुई, जहां समाज के वरिष्ठजन और युवा हाथों में भगवा ध्वज थामे नजर आए। समाज के युवा शिवाजी महाराज की वेशभूषा में नजर आए और उनके जीवन मूल्यों का प्रचार किया। इस दौरान समाज के पदाधिकारियों ने शिवाजी महाराज के शौर्य, प्रशासनिक कौशल और सामाजिक न्याय की भावना को याद किया। संघर्ष और नीतियों से भारतीय समाज को नई दिशा दी इस दौरान समाज के पदाधिकारी ने कहा कि शिवाजी महाराज केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि कुशल शासक और जननायक भी थे। उनका जीवन हमें सत्य, साहस और स्वाभिमान की सीख देता है। शिवाजी महाराज का जीवन हर नागरिक के लिए एक मिसाल है। उन्होंने अपनी बहादुरी, संघर्ष और नीतियों से भारतीय समाज को नई दिशा दी। उनकी वीरता और नेतृत्व आज भी लोगों को सच्चे मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। शिवाजी महाराज का जन्म छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी, 1630 को महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नार के पास शिवनेरी किले में हुआ था। उनके जन्म ने एक ऐसी विरासत की शुरुआत की जिसने भारतीय इतिहास की दिशा को आकार दिया। उन्होंने 16 वर्ष की आयु में सन 1646 को तोरणा किले पर कब्जा करके अपनी पहली सैन्य विजय प्राप्त की। 1674 में, शिवाजी महाराज ने एक स्वतंत्र शासक के रूप में सिंहासन पर बैठने का कार्य किया।

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