तारीख- 15 फरवरी समय- सुबह 11 बजे स्थान- सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल, गढेपान, सिमलिया (कोटा) सरकारी स्कूल में प्रार्थना (प्रेयर) के बाद अचानक से एक-एक कर छात्राएं बेहोश होने लगीं। उनकी आंखों में जलन होने लगी। जी घबराने लगा। सिर में ऐसा दर्द कि आंखों के आगे अंधेरा छा गया। देखते ही देखते पूरे स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल हो गया। आनन-फानन टीचर अपनी ही गाड़ियों में डालकर छात्राओं को हॉस्पिटल ले जाने लगे। पलभर में 15 छात्राओं सहित 18 लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी। इसमें 6 छात्राओं को नाजुक हालत में कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। गांव वालों का आरोप है कि चंबल फर्टिलाइजर्स केमिकल लिमिटेड (CFCL) से अमोनिया गैस रिसने के कारण बच्चों और गांव वालों की हालत बिगड़ी। उधर, फैक्ट्री प्रबंधन ऐसी किसी भी बात से इनकार किया है। साफ कहा कि किसी भी तरह की गैस रिलीज नहीं की गई है। सच जानने के लिए कोटा से करीब 42 किमी दूर सिमलिया के गढेपान गांव भास्कर टीम पहुंची। वहां स्कूल टीचर और गांव वालों से बात की। पढ़िए यह रिपोर्ट… सबसे पहले जानिए 15 फरवरी की सुबह आखिर हुआ क्या था सिमलिया (कोटा) के गढेपान गांव में CFCL फैक्ट्री है। फैक्ट्री के पास ही सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल है। फैक्ट्री स्कूल की बाउंड्री से अटैच है, जबकि फैक्ट्री का गेट 500 मीटर दूर है। स्कूल की वाइस प्रिंसिपल रंजना शर्मा बताती हैं- 15 फरवरी की सुबह दस बजे ग्राउंड में प्रेयर शुरू की। प्रेयर के बीच ही गैस की गंध आने लगी। सवा दस बजे मैंने सीएफसीएल फैक्ट्री में कॉल कर इसकी जानकारी दी। वहां से जवाब मिला कि फैक्ट्री के अंदर तो गंध नहीं आ रही है। मैंने फैक्ट्री के स्टाफ को स्कूल में आकर चेक करने को कहा। प्रेयर के बाद बच्चे अपनी-अपनी क्लास में चले गए। करीब पंद्रह मिनट बाद फैक्ट्री से प्रवीण नाम का कर्मचारी आया। वह पहली मंजिल पर नौवीं क्लास में पहुंचा। उसने कहा कि यहां गैस की बदबू आ रही है। बच्चों को नीचे क्लास में शिफ्ट कर दो। हम नीचे शिफ्ट करने लगे। इतने में बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। स्कूल में हड़कंप मच गया। हमने सरपंच और गांव के लोगों को सूचना दी। टीचर सुरेन्द्र नागर अपनी गाड़ी से 6 बच्चों को लेकर स्थानीय अस्पताल पहुंचे। फैक्ट्री तक जानकारी पहुंची तो वहां से भी एंबुलेंस आ गई थी। एंबुलेंस से बाकी बच्चों को हॉस्पिटल पहुंचाया गया। 15 छात्राओं सहित 18 लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी। इसमें 6 छात्राओं को नाजुक हालत में कोटा के जेके लोन हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया है। खिड़कियां खोलते ही गैस का भभका आया
हादसे के दौरान स्कूल में मौजूद लड़कियों ने बताया था- आंखों में जलन हो रही थी, सांस लेने में तकलीफ थी। इसके बाद टीचर को बताया तो वो हमें हॉस्पिटल लेकर गए। ग्रामीणों के अनुसार, सुबह साढ़े 7 बजे से गैस रिलीज की जा रही थी। स्कूल में छात्राओं ने जैसे ही अपने क्लासरूम की खिड़कियां खोली, गैस का भभका अंदर आया और एक-एक कर बेहोश होने लगी। सबसे बड़ा सवाल- लीकेज नहीं तो गैस कैसे पहुंची स्कूल तक
भास्कर ने मामले में सीएफसीएल के पीआरओ शंशाक राजावत से बात की। उन्होंने कहा- फैक्ट्री में कोई लीकेज नहीं था। सरकारी एजेंसियों ने भी फैक्ट्री में जांच की है। उन्हें भी ऐसी कोई कमी नही मिली है। बच्चों में अमोनिया गैस जैसे ही लक्षण सामने आने के सवाल पर उन्होंने कहा- यह पूरी जांच के बाद ही क्लियर होगा। हमने तो सूचना मिलने के बाद तुरंत एंबुलेंस भेज दी थी। फैक्ट्री से निकलने वाले धुएं या यूरिया के वेस्टेज की गंध से बच्चों की तबीयत बिगड़ने की आशंका को भी कंपनी प्रतिनिधियों ने नकार दिया। एक्सपर्ट बोले- लक्षण अमोनिया गैस जैसे, पड़ताल ये हो कि गैस वहां पहुंची कैसे
भास्कर ने केमिकल एक्सपर्ट प्रो. विजय देवड़ा से बात की। उन्होंने बताया- बच्चों ने तेज गंध महसूस की है। जो लक्षण उनमें आए हैं, वो अमोनिया के प्रभाव में आने के बाद जैसे ही लक्षण है। विभागों की जांच में लीकेज नहीं मिला। संभव है कि घटना हुई उस समय लीकेज का पता न लगा हो। बाद में स्थिति को कंट्रोल कर लिया गया हो। अमोनिया के अलावा दूसरी आशंका है कि फैक्ट्री की चिमनी से निकलने वाले धुएं में कार्बन होता है। इसकी अधिक मात्रा भी नुकसान पहुंचाती है। तीन दिन बाद भी असर, सामने आ रहे मरीज
भास्कर टीम जैसे ही स्कूल पहुंची तो स्कूल स्टाफ दसवीं कक्षा के छात्र हरीश मेहरा को अपने साथ लेकर जा रहा था। पता चला कि 16 फरवरी की रात से उसकी तबीयत बिगड़ रही थी। 17 फरवरी को स्कूल आने के बाद तबीयत और ज्यादा खराब हो गई। सीने और आंखों में जलन हो रही थी। हिंदी के टीचर रामविलास और सीनियर टीचर योगेंद्र जैन ने बताया- कई बच्चों में अब भी गैस का असर है। बच्चों के साथ हॉस्पिटल गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हेमंत कुमार की भी तबीयत बिगड़ गई थी। 16 फरवरी की रात को तीन और बच्चों में घबराहट, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्या हुई थी। डर के कारण घरवाले बच्चों को नहीं भेज रहे स्कूल
गढेपान के सरकारी स्कूल में 399 स्टूडेंट्स हैं। हादसे के बाद 17 फरवरी को स्कूल खुला। 399 में से 91 बच्चे ही आए। नौवीं कक्षा की छात्रा शिवानी ने बताया- मैं घटना वाले दिन क्लास में ही थी। 11 बजे के आस पास बहुत तेज बदबू आने लग गई थी। हमारी क्लास की कई लड़कियों को चक्कर आने लग गए थे। छात्रा आयुषी ने बताया- गैस की ऐसी बदबू पहले भी आती रही है। गांव में भी इस तरह की बदबू आती है। 11वीं कक्षा के छात्र सुमित कहते हैं- अचानक ही क्लास में बैठने के बाद लड़कियों को चक्कर आने लगे थे। वाइस प्रिंसिपल ने बताया कैसे बिगड़े हालात खून में जहरीली गैस के असर की होगी जांच
तीन दिन बाद भी हादसे के कारणों का पता नही लगने के बाद अब एफएसएल मामले की जांच में जुटी है। बच्चों के सैंपल लिए हैं। खून में अमोनिया या जहरीली गैस को ट्रेस करेंगे। गैस कहां से आई, क्या घटनाक्रम हुआ, उसकी विशेष जांच करवाई जा रही है। ग्रामीणों का दावा- स्किन एलर्जी से जूझ रहे, कारण- फैक्ट्री की गैस, वेस्ट
गढेपान में दो हजार से ज्यादा की आबादी है। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्री में खतरनाक केमिकल का प्रयोग होता है। ईमित्र का काम करने वाले हंसराज ने बताया- परिवार में उसके, पत्नी और बेटी के स्किन एलर्जी हो गई। एक बार ठीक हो जाती है फिर दोबारा हो जाती है। आत्माराम ने बताया कि जिस दिन स्कूल वाला हादसा हुआ था तो वह मदद के लिए स्कूल गया था। कुछ देर बाद उसके भी आंखों में जलन होने लगी। गले में दिक्कत होनी लगी थी। स्किन में एलर्जी हो गई है। हाथ-पैरों में दर्द रहता है। फैक्ट्री से गैस का कई बार रिसाव होता है। सीएफसीएल में ही काम करने वाले अनिल ने बताया कि चार साल से गले में परेशानी से जूझ रहे हैं। अमोनिया से फसलों को भी नुकसान
गांव के भगवानी प्रसाद बताते हैं- साल 2019 में फैक्ट्री के खिलाफ केस भी किया था। उस समय मेरी सोयाबीन की फसल खराब हो गई थी। केस का आज तक कुछ नही हुआ, उल्टा मुझे धमकाया गया था। गांव के छगन लाल ने बताया कि उनकी चालीस बीघा जमीन थी। फसल पूरी जल गई थी। कारण सिर्फ अमोनिया गैस ही थी। हमने शिकायत भी की थी। कोई सुनवाई नहीं हुई। गांवों में सर्वे, स्कूल में बच्चों की जांच
घटना के बाद से ही चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है। डॉ. राजेश सामर ने बताया कि गांव में सर्वे करवाया गया है। अभी स्थिति नॉर्मल है। कुछ बच्चों की फिर तबीयत बिगड़ी थी। उनका इलाज करवाया जा रहा है। अमोनिया गैस से सांस लेने में दिक्कत, जलन, गले में परेशानी होती है। लंबे समय तक इसके असर से चर्म रोग होने की आशंका बनी रहती है। किसने, क्या कहा- अगर फैक्ट्री से कोई लीकेज होता है तो यूनिट अपने आप ट्रिप हो जाती है। अमोनिया खतरनाक गैस होती है, ऐसे में उसे रिलीज करने का सवाल ही नहीं उठता।
-शशांक राजावत, पीआरओ, चंबल फर्टिलाइजर्स केमिकल लिमिटेड (CFCL) पीड़ित बच्चों में लक्षण अमोनिया गैस जैसे ही हैं। अब यह जांच का विषय है कि लापरवाही कैसे हुई।
-हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्री फैक्ट्री का कर्मचारी स्कूल आया था। उसने कहा था कि यहां गैस की बदबू आ रही है। बच्चों को नीचे क्लास में शिफ्ट कर दो। इतने में बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी थी।
-रंजना शर्मा, वाइस प्रिंसिपल, राजकीय बच्चों ने तेज गंध महसूस की है। जो लक्षण उनमें आए हैं, वो अमोनिया के प्रभाव में आने के बाद जैसे ही लक्षण हैं।
-प्रो. विजय देवड़ा, केमिकल एक्सपर्ट कोटा के गांव में गैस रिसाव की ये खबरें भी पढ़िए..


