छत्तीसगढ़ के धमतरी में जिला पंचायत चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के समधी ने क्षेत्र क्रमांक 9 से शानदार जीत दर्ज की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को लगभग 9,500 वोटों के अंतर से पराजित किया। यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक है। इस क्षेत्र में भाजपा को 20 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सफलता मिली है। विजेता उम्मीदवार का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प रहा है। वर्ष 1982 में वे थानेदार के पद पर थे और अब 2025 में जिला पंचायत सदस्य बने हैं। इस हार के बाद कांग्रेस में भूचाल आ गया है। जिला अध्यक्ष के इस्तीफे की अटकलें तेज हो गई हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने जिला अध्यक्ष को तलब किया है। पार्टी के भीतर इस हार की समीक्षा की जा रही है। यह चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है। साय के समधी से हाईप्रोफाइल हो गया था चुनाव दरअसल, धमतरी जिले के मगरलोड जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक 9 से सीएम साय के समधी टीकाराम कंवर चुनाव लड़े। जिस क्षेत्र से सीएम के समधी चुनाव लड़े, वह क्षेत्र काफी हाईप्रोफाइल माना जा रहा है। सीएम के समधी टीकाराम कंवर ने क्षेत्र क्रमांक 9 से अनुसूचित जाति मुक्त में चुनाव लड़ा और भारी मतों से जीत हासिल किया। टीकाराम जिस क्षेत्र से चुनाव लड़े हैं, उस क्षेत्र क्रमांक में 32 ग्राम पंचायत, 68 गांव और 72 बूथ है। जहां टीकाराम कंवर ने कुछ बूथ को छोड़कर सभी बूथों पर लीड किया। बताया जा रहा है कि क्षेत्र क्रमांक 9 में करीब साढ़े 9 हजार हजार वोटों से सीएम के समधी ने जीत हासिल की। टीकाराम के जीतने पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने इस्तीफा देने की कही थी बात चुनाव से पहले जिला पंचायत के नामांकन फार्म भरे गए थे, जिसमें दावा-आपत्ति का समय भी था। इस दौरान, टीकाराम कंवर के प्रतिद्वंदी उत्तम मरकाम के खिलाफ भाजपा के अभिकर्ता ने आपत्ति जताई थी, लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने इसे खारिज कर दिया। इसी दिन कांग्रेस के जिला अध्यक्ष शरद लोहाना ने कहा था कि यदि टीकाराम कंवर चुनाव जीतते हैं, तो वह इस्तीफा देंगे। इसके बाद इस पर सियासत गरमा गई है। इस मामले में भाजपा के प्रदेश महामंत्री, नवनिर्वाचित महापौर रामू रोहरा ने कहा कि आज तक कांग्रेस ने जो भी कहा उसे कभी पूरा नहीं किया। कांग्रेस के लोग झूठे हैं और झूठे वादा करते हैं। धमतरी में जिस दिन कांग्रेस का सूपड़ा साफ हुआ उसी दिन इस्तीफा दे देना चाहिए था। चैलेंज करने से पहले सोचना चाहिए। अभी जिला पंचायत सदस्य के प्रत्याशी जीत चुके हैं। उनको इस्तीफा दे देना चाहिए। टीकाराम कंवर ने अपने बारे में बताते हुए कहा कि, “1982 में पुलिस विभाग में थानेदार के रूप में नियुक्त हुआ था, ताकि मैं लोगों की सेवा कर सकूं। अब, मुझे राजनीति में पदधारी सदस्य के रूप में और अधिक सेवा करने का मौका मिल रहा है। जब तक शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहूंगा, तब तक मैं लोगों की समस्याओं के समाधान में और जनहित कार्यों में जुटा रहूंगा।


