शहर के 7 विधानसभा हल्कों में 135.85 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों को अपग्रेड करने की महत्वाकांक्षी योजना अब समय की सुइयों में उलझती नजर आ रही है। नगर निगम ने लुक (हॉट मिक्स) और सीमेंटेड (आरएमसी) सड़कों के निर्माण के लिए 20 टेंडर जारी किए, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि अब तक केवल 8 प्रोजेक्ट्स को ही वर्क ऑर्डर मिल पाया है। बाकी फाइलें मंजूरियों, कानूनी राय और कमेटियों के बीच अटकी हैं। केंद्र सरकार की साफ शर्त है 31 मार्च 2026 तक काम पूरा कर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा किया जाए, तभी पूरा फंड जारी होगा। यानी विकास की यह गाड़ी अब डेडलाइन की पटरी पर दौड़ रही है। अगर समय पर काम पूरे नहीं हुए तो 135.85 करोड़ का फंड अटक सकता है और नगर निगम के सामने वित्तीय संकट खड़ा हो सकता है। यानी निगम की बीएंडआर ब्रांच दोहरी चुनौती में फंसी है। एक तरफ डेडलाइन का दबाव, दूसरी तरफ अधूरी पाइपलाइन परियोजना। 2027 के चुनाव नजदीक आने की वजह से भी राजनीतिक दबाव बढ़ा हुआ है। विधायकों की प्राथमिकता विकास कार्यों को तेजी से दिखाना है, लेकिन बिना समन्वय के जल्दबाजी भविष्य में भारी पड़ सकती है। इन हलकों में अपग्रेड होनी हैं 135.85 करोड़ की सड़कें जस्सियां में चल रहा निर्माण कार्य। (फाइल फोटो) पहले काम फिर पैसे का नियम हकीकत जानिए… आधे से कम प्रोजेक्ट ही जमीन पर उतरने की स्थिति में मंजूरियों, कानूनी राय और कमेटियों के बीच अटकी फाइलें {फंड पर सबसे बड़ा सवाल: इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी चुनौती फंडिंग को लेकर है। केंद्र सरकार ने अभी तक कोई एडवांस राशि जारी नहीं की। नियम के मुताबिक पहले काम पूरा होगा, फिर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट जमा होगा और उसके बाद फंड रिलीज होगा। नगर निगम की मौजूदा आर्थिक हालत पहले से दबाव में है। कर्मचारियों की सैलरी तक जीएसटी फंड पर निर्भर है। ऐसे में यदि काम शुरू हो गए और मार्च तक पूरे नहीं हुए तो भुगतान का संकट गहरा सकता है।
{हल्का नार्थ 62.20 करोड़ रुपए {हल्का साउथ 10.80 करोड़ रुपए {आत्म नगर 17.14 करोड़ रुपए {सेंट्रल 14.84 करोड़ रुपए {वेस्ट 13.14 करोड़ रुपए {पूर्वी 12.53 करोड़ रुपए {साहनेवाल 5.20 करोड़ रुपए {मौसम भी बना अड़चन: समय की कमी के साथ मौसम भी चुनौती है। सर्दियों में हॉट मिक्स प्लांट बंद रहते हैं और मार्च में ही पूरी क्षमता से शुरू होते हैं। यानी लुक वाली सड़कों के लिए असल काम का समय बेहद सीमित है। हां, आरएमसी सड़कों का निर्माण संभव है, लेकिन उनके टेंडर भी पूरी तरह क्लियर नहीं हुए। अगर अगले कुछ दिनों में 50 फीसदी काम भी अलॉट हो जाते हैं, तब भी इतनी कम अवधि में सभी सड़कों का निर्माण पूरा करना आसान नहीं होगा। {24 घंटे पानी की योजना भी आड़े: शहर में 24 घंटे पानी सप्लाई योजना के तहत नई पाइपलाइनें बिछाई जा रही हैं। ऐसे में अगर जल्दबाजी में सड़कें बना दी गईं तो कुछ ही समय बाद पाइपलाइन के काम के कारण उन्हें दोबारा तोड़ना पड़ेगा। पूरे शहर में पाइपलाइन का काम अभी बाकी है और कई हिस्सों में जारी भी है। {50 साल की ब्याज मुक्त लोन योजना: यह प्रोजेक्ट केंद्र की 50 साल ब्याज मुक्त लोन स्कीम के तहत मिला है। 135.85 करोड़ रुपए की राशि किश्तों में 50 वर्षों में लौटानी होगी। निगम के पास विकास के लिए अलग से पर्याप्त फंड नहीं है, इसलिए इस योजना को शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की बड़ी उम्मीद माना जा रहा था। {अधिकारियों का दावा: एसई शाम लाल गुप्ता ने पुष्टि की है कि 8 कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं। कुछ प्रस्ताव लीगल में हैं और कुछ एफएंडसीसी की मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 31 मार्च तक सभी काम पूरे करने की कोशिश की जाएगी। 20 टेंडरों में से 8 को वर्क ऑर्डर जारी हो चुके हैं। तीन टेंडर ओपन हो गए, लेकिन फाइनेंस एंड कॉन्ट्रैक्ट कमेटी (एफएंडसीसी) की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ पा रहे। जब तक कमेटी प्रस्ताव को पास नहीं करती तब तक ठेकेदारों को काम अलॉट नहीं हो सकता। पांच टेंडर ठेकेदारों की आपसी खींचतान के चलते कानूनी पेंच में फंसे हुए हैं। इन मामलों में लीगल राय के लिए प्रस्ताव चंडीगढ़ भेजे गए हैं। कानूनी राय आने के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी। इसके अलावा दो काम ऐसे हैं जिनके लिए चीफ इंजीनियर की अंतिम स्वीकृति बाकी है। यानी कुल मिलाकर 10 काम अभी भी कागजी प्रक्रिया में उलझे हैं।


