भास्कर न्यूज | जालंधर इस्लाम धर्म के सबसे पाक महीने रमजान की शुरुआात होने वाली है। इस्लाम के पांच अहम बिंदुओं में रमजान के रोजा रखना भी शामिल है। ऐतिहासिक इमाम नासिर मस्जिद के मौलाना अदनान जामई ने बताया कि अगर बुधवार को चांद नजर आया तो वीरवार को रमजान महीने का पहला रोजा रखा जाएगा नहीं तो शुक्रवार से रमजान शुरू होगा। हालांकि ज्यादातर मौलाना वीरवार को ही रमजान शुरू होने का कह रहे है। इस्लाम धर्म के अनुसार इस महीने सबसे ज्यादा मगफिरत मतलब अल्लाह द्वारा गुनाहों को माफ करना होता है। रमजान के पूरे महीने रोजा रखने के साथ ही खुद को इस्लामिक रीति रिवाजों के मुताबिक ढालना ही सबसे अहम होता है, जिसमें पांच वक्त की नमाज पढ़ना, कुरान पढ़ना, रात को तरावीह की विशेष नमाज और जकात देना (दूसरों की मदद) करना शामिल है। तरावीह की नमाज को लेकर सभी मस्जिदों में प्रबंध किया जा चुका है, यहां पर 21 दिन से लेकर 30 दिन तक रोजाना नमाज होगी। रमजान इस्लामी कैलेंडर के नौवें महीने में आता है। इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा पर आधारित होता है, इसलिए हर साल रमजान की तारीख लगभग 10-11 दिन पहले आ जाती है। सुबह सूर्य उदय होने से पहले सहरी यानि की रोजा रखना शाम सूर्य अस्त होने के समय इफ्तारी करना यानि रोजा खोलना होता है। रमजान इसलिए पवित्र है क्योंकि इसी महीने में पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब पर पहली बार कुरान की आयतें नाजिल हुई थीं। रमजान का उद्देश्य, दूसरों के साथ हमदर्दी, अनुशासन में रहना, न बुरा देखना, न बुरा बोलना, न बुरा सुनना और न ही बुरा करना शामिल है। भूख और प्यास का अनुभव कर गरीबों के प्रति संवेदना को अपने अंदर बढ़ाना है। ताकि यह एहसास किया जा सके कि पानी से लेकर खाद्य पदार्थ हमारे लिए कितने जरूरी है और उन्हें वेस्ट नहीं करना चाहिए और यह एहसास होना चाहिए कि जरूरतमंद जिनके पास खाने या पीने का पानी नहीं है तो उन्हें कैसे महसूस होगा। सहरी: सुबह फज्र की नमाज से पहले खाना खाना इफ्तार : सूर्यास्त के बाद रोज़ा खोलना (खजूर और पानी से) नमाज और तरावीह : दिन में 5 वक्त नमाज के अलावा रात में विशेष तरावीह की नमाज होती है। जिसमें इमाम के पीछे पुरा कुरान सुना जाता है। जकात और सदका : रमजान के पूरे महीने में दान-पुण्य का विशेष महत्व है। जरूरतमंदों को अपनी जमापूंजि, बैंक में रखे पैसे, कैश, सोने और चांदी के गहनों के आधार पर जकात दिया जाता है।


