पीएचडी डिग्री किसी भी शोधार्थी की अकादमिक पहचान का अंतिम और औपचारिक प्रमाण होती है। लेकिन जब उसी डिग्री में शोध किस विषय से कर रहे हैं, वही दर्ज न हो, तो स्थिति असहज और जटिल हो जाती है। रांची यूनिवर्सिटी में में रिसर्च स्कॉलरों को प्रदान की जा रही पीएचडी डिग्री में विषय (संबंधित सब्जेक्ट) का उल्लेख नहीं होता है। डिग्री पर सिर्फ संकाय ( फैकल्टी/स्ट्रीम) लिखा रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रारूप शोध की विशिष्टता को धुंधला करता है और अभ्यर्थियों को हर औपचारिक मंच पर अपनी विशेषज्ञता साबित करने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ते हैं। राज्य के अन्य विवि में क्या है प्रावधान : राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों में पीएचडी डिग्री में संकाय के साथ-साथ विषय का स्पष्ट उल्लेख किया जाता है। उदाहरणस्वरूप डॉक्टर ऑफ फिलॉस्फी इन पॉलिटिकल साइंस, डॉक्टर ऑफ फिलॉस्फी इन केमिस्ट्री। इससे अभ्यर्थी को कहीं भी अपनी विशेषज्ञता साबित करने के लिए अतिरिक्त प्रमाण प्रस्तुत नहीं करना पड़ता। जानकारों के अनुसार, विषय का उल्लेख पारदर्शिता और मानकीकरण का हिस्सा है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यही प्रचलित प्रारूप माना जाता है। अभ्यर्थी कैसे दूर करते हैं प्रॉब्लम जब इंटरव्यू बोर्ड या संस्था पीएचडी डिग्री में विषय के अभाव पर सवाल उठाती है, तो अभ्यर्थी रांची विवि मुख्यालय में आवेदन देते हैं। इसके बाद विश्वविद्यालय अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करता है, जिसमें लिखा होता है कि संबंधित शोधार्थी ने अमुक विषय में पीएचडी की है। इस प्रक्रिया में समय लगाता है। क्यों जरूरी है विषय का उल्लेख पीएचडी विशिष्ट शोध का प्रतीक है, सामान्य संकाय का नहीं। अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार डिग्री में डिसिप्लीन का स्पष्ट उल्लेख अनिवार्य माना जाता है। यदि डिग्री में विषय न हो, तो यह अभ्यर्थी की विशेषज्ञता की प्रामाणिकता को कमजोर कर देता है। 3 मामलों से समझें परेशानी क्या 1. असिस्टेंट प्रोफेसर इंटरव्यू में अटकाव: सोशल साइंस संकाय से पीएचडी करने वाले एक अभ्यर्थी ने असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए दिल्ली विवि में इंटरव्यू में भाग लिया। डिग्री पर विषय नहीं देखकर चयन समिति ने स्पष्टीकरण मांगा। अभ्यर्थी को अतिरिक्त दस्तावेज और विवि का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना पड़ा। 2. रिसर्च प्रोजेक्ट में तकनीकी आपत्ति: साइंस संकाय के एक शोधार्थी ने राष्ट्रीय स्तर की रिसर्च परियोजना में आवेदन किया। स्क्रीनिंग के दौरान यह प्रश्न उठा कि उनका विशेषज्ञता क्षेत्र कौन-सा है- बॉटनी या जूलॉजी? डिग्री में स्पष्ट उल्लेख न होने से आवेदक को काफी परेशानी हुई। दूसरे विवि में क्या फॉर्मेट है, अध्ययन कर निर्णय लिया जाएगा पीएचडी डिग्री में संकाय (फैकल्टी) व्यापक श्रेणी है, जबकि विषय ( सब्जेक्ट) विशिष्ट क्षेत्र। उदाहरण स्वरूप सोशल साइंस के अंतर्गत राजनीति विज्ञान, एंथ्रोपोलॉजी, सोशियोलॉजी, ज्योग्राफी, होम साइंस, इतिहास, फिलॉस्फी समेत आधा दर्जन से अधिक विषय आते हैं। साइंस के अंतर्गत बॉटनी, जूलॉजी, केमिस्ट्री, फिजिक्स, जियोलॉजी, मैथ्स जैसे अलग-अलग विषय हैं। लेकिन डिग्री पर केवल सोशल साइंस या साइंस लिखा रहता है। संकाय बनाम विषय : फर्क समझना जरूरी
अब आगे क्या… रांची विवि प्रशासन को पीएचडी डिग्री फॉर्मेट में संशोधन के लिए प्रस्ताव तैयार करना होगा। इस प्रस्ताव पर विवि की एकेडमिक काउंसिल से स्वीकृति लेनी होगी। उसके बाद नोटिफिकेशन जारी करना होगा। यही इस प्रॉब्लम का स्थायी समाधान है। 3. विदेश में रिसर्च आवेदन में बाधा: एक ह्यूमैनिटीज शोधार्थी ने विदेशी विश्वविद्यालय में रिसर्च के लिए आवेदन जमा किया। विदेशी विवि ने विषय-विशिष्ट का प्रमाण मांगा। डिग्री में केवल संकाय का नाम होने के कारण उन्हें अलग से विवि से पत्र जारी करवाना पड़ा।


