लुधियाना में सेहत विभाग की बड़ी लापरवाही:15 महीने में भरे महज 49 बेकरी सैंपल, अफसरों के खिलाफ शिकायत

पंजाब के लुधियाना में सेहत विभाग पब्लिक की लापरवाही सामने आई है। सेहत विभाग लोगों की सेहत के प्रति गंभीर नहीं है। सेहत विभाग लुधियाना जिले में नियिमत तौर पर फूड प्रोडक्ट की सैंपलिंग नहीं कर रहा है। सेहत विभाग ने 15 महीनें में सिर्फ 49 सैंपल भरे हैं। अगर औसत देखी जाए तो सेहत विभाग ने प्रति माह लगभग तीन सैंपल लिए। सेहत विभाग की इस लापरवाही का खुलासा तब हुआ जब आरटीआई एक्टिविस्ट रोहित सभ्रवाल ने सिविल सर्जन दफ्तर से इस संबंध में सूचना मांगी। रोहित सभ्रवाल ने सिविल सर्जन लुधियाना को इस संबंध में शिकायत दी है और जिम्मेदार अफसरों पर सख्त कार्रवाई की डिमांड की है। उनका कहना है कि इतने बड़े शहर में सैकड़ों की तादात में बेकरी हैं और हजारों की तादात में बेकरी प्रोडक्ट बेचने वालों की दुकानें हैं। 8 अक्तूबर 2024 से 10 जनवरी 2026 की है रिपोर्ट आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार सेहत विभाग ने 8 अक्तूबर 2024 से 10 जनवरी 2026 तक सेहत विभाग ने लुधियाना की अलग-अलग बेकरियों से 49 सैंपल लिए। उसमें से कितने सैंपल पास हुए और कितने फेल हुए यह भी स्पष्ट नहीं किया है। दिवाली के दो सीजन भी हैं इसमे शामिल 8 अक्तूबर 2024 से 10 जनवरी 2026 के बीच में दिवाली के दो सीजन निकले हैं। दिवाली के सीजन में बेकरी प्रोडक्ट की डिमांड ज्यादा होती है ऐसे में सब स्टैंडर्ड बेकरी प्रोडक्ट के मार्केट में बिकने के ज्यादा चांस होते हैं। यही नहीं बेकरी प्रोडक्ट ज्यादातर लूज बेचे जाते हैं इसलिए उन पर कंपनी का नाम भी नहीं होता है। बेकरी प्रोडक्ट की सैंपलिंग बेहद जरूरी रोहित सभ्रवाल का कहना है कि लुधियाना जिले में सैकड़ों की तादात में बेकरियां हैं और 15 महीने में सिर्फ 49 सैंपल भरना सीधे तौर पर पब्लिक की सेहत से खिलवाड़ है। उन्होंने कहा कि बेकरी के ज्यादातर प्रोडक्ट बिना एक्सपायरी डेट के बेचे जाते हैं। ऐसे में उनकी नियमित जांच बेहद जरूरी है। अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की डिमांड रोहित सभ्रवाल ने बताया कि उन्होंने अब सिविल सर्जन से संबंधित अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि फूड प्रोडक्ट की सैंपलिंग न करना सीधे तौर पर पब्लिक की सेहत के साथ खिलवाड़ है। सैंपल फेल होने वालों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई सिविल सर्जन दफ्तर के फूड सेफ्टी अफसर का कहना कि सैंपलों की जांच के बाद जो फेल हुए हैं उनके खिलाफ संबंधित अदालत में केस दायर कर दिया गया है। उनके संबंध में कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

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