मप्र ने संपदा 1.0 और सम्पदा 2.0 के बाद मप्र ने अब नया डिजिटल नवाचार किया है। अब 141 दस्तावेजों में से लोन, लीज डीड, पावर ऑफ अटार्नी, पार्टनरशिप डीड जैसे 75 तरह के दस्तावेज बिना सब रजिस्ट्रार के दफ्तर गए मप्र या किसी भी राज्य से घर बैठे रजिस्टर किए जा सकेंगे। कुछ ही मिनटों में रजिस्टर दस्तावेज की कॉपी पक्षकार को उनके मोबाइल या लैपटॉप में मिल जाएगी। इसके लिए भोपाल स्थित पंजीयन भवन में साइबर सब रजिस्ट्रार कार्यालय ने काम शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को राजधानी में कार्यालय का उद्घाटन करते हुए कहा कि अब सरकार और उसके उपक्रमों के ट्रांसफर से जुड़े दस्तावेजों का पेपरलेस रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। नागरिक कहीं बैठकर दस्तावेज ऑनलाइन रजिस्टर करा पाएंगे। अब तक संपदा 2.0 में 14 लाख 95 हजार से अधिक दस्तावेजों का पंजीयन हो चुका है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि पंजीयन से जुड़े कामों को त्रुटि रहित बनाने के प्रदेशभर के 14 लाख कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी गई है। विदेश में रहने वालों को भी इस नई सुविधा का फायदा मिलेगा। आईजी पंजीयन अमित तोमर ने भास्कर से चर्चा में कहा कि अब तक भोपाल में बैठे सब रजिस्ट्रार बाहर के जिलों के दस्तावजों के पंजीयन नहीं कर सकते थे। अब साइबर सब रजिस्ट्रार यहीं बैठकर प्रदेश भर में कहीं के दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीयन करेंगे। जनता की सुविधा के लिए कई दस्तावेजों के फॉर्मेट भी ऑनलाइन अपलोड किए गए हैं। भोपाल से सिंगरौली और उज्जैन के दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीयन
साइबर पंजीयन के लिए 6 सब रजिस्ट्रार भोपाल में नियुक्त किए गए हैं। ये यहीं से मप्र के किसी भी जिले के तय दस्तावेजों का ऑनलाइन पंजीयन करेंगे। सोमवार को सिंगरौली के प्रॉपर्टी लोन और उज्जैन की औद्योगिक जमीन की लीज डीड का पंजीयन लाइव वीडियो केवाईसी के आधार पर किया गया। संपदा 2.0 से 4 हजार पेड़ बचे, 21 लाख किग्रा कार्बन उत्सर्जन कम
अक्टूबर 2024 से संपदा 2.0 के तहत फेसलेस पंजीयन शुरू हुआ था। अब तक 15 लाख दस्तावेजों के ऑनलाइन पंजीयन से कागज की बचत हुई, जिससे 4 हजार पेड़ कटने से बचे। कुल 28 लाख गवाहों को दफ्तर नहीं आना पड़ा, इससे परिवहन से 21 लाख किग्रा कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन कम हुआ।


