मप्र में किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुरू की गई योजनाएं अब उलझनों में फंसती नजर आ रही हैं। पीएम-कुसुम और पीएम कृषक मित्र सूर्य योजना से जुड़े किसान अलग-अलग स्तर पर परेशान हैं। कहीं पुराने किसानों को समय विस्तार (एक्सटेंशन) नहीं मिल रहा, कहीं नए किसानों के 4000 मेगावॉट के पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) डेढ़ महीने से अटके हैं, तो जिलों में सोलर पंप योजना में सब्सिडी और कर्ज की शर्तों को लेकर भ्रम बना हुआ है। 1. पीएम-कुसुम योजना के तहत ऊर्जा विकास निगम ने दिसंबर में करीब 85 किसानों को लेटर ऑफ अलॉटमेंट (एलओए) जारी किए थे। इनसे कुल 4000 मेगावॉट सौर उत्पादन का लक्ष्य तय किया गया है। सरकार 2.40 से 2.85 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली खरीदेगी। लेकिन डेढ़ महीना बीतने के बाद भी एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी (एमपीपीएमसीएल) ने पीपीए का वितरण शुरू नहीं किया है। 2. पीएम कृषक मित्र सूर्य योजना में भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। कई जिलों में बैंकों ने सोलर पंप के लिए लोन स्वीकृत कर दिए हैं। नीमच जिले में एक किसान की परियोजना लागत 4.04 लाख रुपए बताई गई है। इसमें केवल 1.09 लाख रुपए सब्सिडी दर्ज है। किसान से करीब 41 हजार रुपए मार्जिन मनी ली गई है और शेष 2.53 लाख रुपए बैंक ऋण के रूप में दिए गए हैं। किसानों को 84 महीनों तक लगभग 3,987 प्रतिमाह ईएमआई चुकानी होगी। 3. पिछले साल जनवरी में जिन किसानों से पीपीए किए गए थे, उन्हें काम शुरू करने में देरी हुई और बारिश के कारण तय समय में प्लांट नहीं लग सका। अब वे समय विस्तार की मांग कर रहे हैं, लेकिन कंपनी एक्सटेंशन देने को तैयार नहीं है। इससे कई किसानों के करोड़ों रुपए फंसे हुए हैं। विभाग का पक्ष पीपीए के मामले में हमने नियामक आयोग से प्रक्रिया में तेजी लाने का अनुरोध किया है ताकि परियोजनाएं समय पर शुरू हों। वहीं सोलर पंप में सब्सिडी को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। इस योजना में किस्त सरकार ही भरेगी।” – मनु श्रीवास्तव, अपर मुख्य सचिव, नवीकरणीय ऊर्जा विभाग


