कक्षा दसवीं के बाद लिया गया एक निर्णय आने वाले 30-40 साल की दिशा तय कर देता है। यह बात शासकीय हाई स्कूल छिरहा में आयोजित करियर काउंसिल सत्र में प्राचार्य ने विद्यार्थियों से कही। स्कूल में 9वीं और दसवीं के छात्र-छात्राओं के लिए करियर काउंसिलिंग, लक्ष्य निर्धारण और समय प्रबंधन पर विशेष मार्गदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों को विषय चयन की बारीकियों और भविष्य की संभावनाओं से अवगत कराया गया। प्राचार्य डॉ. रमेश चंद्रवंशी ने कहा कि कक्षा पहली से दसवीं तक विषय निर्धारित होते हैं। लेकिन दसवीं के बाद मिलने वाला विकल्प ही वास्तविक मोड़ होता है। इसी समय विद्यार्थी अक्सर सबसे बड़ी गलती कर बैठते हैं। दोस्तों की देखा-देखी या समाज के दबाव में स्ट्रीम चुन लेते हैं। उन्होंने बताया कि यह धारणा पूरी तरह गलत है कि अधिक अंक आने पर गणित या विज्ञान, औसत पर कॉमर्स और कम अंक पर कला लेना चाहिए। विषय चयन अंकों से नहीं, बल्कि छात्र की रुचि, योग्यता और पिछले दो-तीन वर्षों के प्रदर्शन के विश्लेषण से होना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि किसी विद्यार्थी की रुचि लेखन, संगीत, चित्रकला, कृषि या तकनीकी कार्यों में है, तो उसे उसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। आज के दौर में हॉबी को प्रोफेशन में बदलने वाले विद्यार्थी ही अधिक संतुष्ट और सफल दिखाई दे रहे हैं। व्यापमं की प्रतियोगी परीक्षा के बारे दी गई जानकारी विद्यार्थियों को व्यापमं द्वारा आयोजित परीक्षाओं, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे, बैंकिंग, पुलिस, सेना और लोक सेवा आयोग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। साथ ही इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यताओं और रणनीति को बताया। करियर के सभी विकल्पों से कराया गया परिचय विद्यार्थियों को विभिन्न स्ट्रीम और उनसे जुड़े करियर विकल्पों की विस्तृत जानकारी दी गई। विज्ञान (मैथ्स/बायो) पढ़कर इंजीनियरिंग, मेडिकल, फार्मेसी, रिसर्च, डिफेंस में जा सकते हैं। इसी तरह कॉमर्स पढ़कर चार्टर्ड अकाउंटेंसी, बैंकिंग, मैनेजमेंट, उद्यमिता, कृषि व गृह विज्ञान की पढ़ाई कर एग्री-बिजनेस, फूड टेक्नोलॉजी, ग्रामीण विकास और आईटीआई व पॉलिटेक्निक कर तकनीकी कौशल आधारित रोजगार कर सकते हैं।


