जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की रहस्यमयी मौत के मामले में बोरानाडा थाना पुलिस ने कंपाउंडर देवी सिंह राजपुरोहित के खिलाफ देर रात मुकदमा दर्ज कर लिया है। SIT की अब तक की जांच में कंपाउडर की लापरवाही के सबूत मिले हैं। एफएसएल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई तेज हो गई है। हालांकि मामला दर्ज होने के बाद कंपाउडर जमानती मुचलका पेश करेंगे। इसके आधार पर जमानत मुचलका पेश करने के बाद ट्रायल होगी। आरोप प्रमाणित माने जाते हैं तो दो साल की सजा हो सकती है। गौरतलब है कि एसआईटी ने मेडिकल बोर्ड से एच शिड्यूल के इन इंजेक्शनों को लेकर सवाल किए थे। इनके जवाब सोमवार दोपहर को ही मिले थे। देवीसिंह से एसआईटी ने 20 दिन में करीब 5 बार पूछताछ की। इन सवालों के जवाब उलझे कंपाउंडर आश्रम पहुंचा तब साध्वी को अस्पताल ले जाने जैसी स्थिति नहीं थी। इसलिए घर पर इंजेक्शन दिए। इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि 20 मिनट में मौत हो गई? अगर तबीयत ज्यादा खराब थी तो इंजेक्शन लगने के बजाय अस्पताल जाने की सलाह क्यों नहीं दी? जबकि कंपाउंडर जानता था कि इंजेक्शन एच शिड्यूल के हैं। साध्वी अस्थमा की मरीज थी तो कंपाउंडर ने। (पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन क्यों लगाया
यह था मामला जोधपुर के पाल रोड आरती नगर स्थित आश्रम में 28 जनवरी को साध्वी को सांस लेने में परेशानी हुई। इसके बाद आश्रम पहुंचे कंपाउंडर देवीसिंह ने इंजेक्शन लगाए। बाद में साध्वी की हालत बिगड़ी तो उन्हें प्रेक्षा हॉस्पिटल लाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बाद में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया। वहीं एफएसएल की रिपोर्ट में सांस संबंधी बीमारी से मौत होना सामने आया।
पूछताछ में सामने आया कि एसआईटी की पूछताछ के दौरान देवीसिंह ने हर बार नई कहानी गढ़ी। पहले साध्वी के पिता वीरमनाथ की ओर से उपलब्ध कराई गई 3 माह पुरानी पचीं के आधार पर इंजेक्शन लगाने का दावा किया। फिर कहा कि अंसे मेडिकल स्टोर में खरीदे। हालांकि, स्टोर संचालक ने इनकार किया।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार देवीसिंह ने डेक्सेना व डाइक्लोफेनिक इंजेक्शन लगाए थे। H शिड्यूल में वे दवा या इंजेक्शन आते हैं, जो डॉक्टर की लिखी पर्ची पर मिल सकते या लगाए जा सकते हैं। एसआईटी ने बोर्ड से अस्थमा के मरीजों को ये इंजेक्शन देने या नहीं देने, रिएक्शन आदि सहित कई सवाल पूछे थे।


