जेईई मेंस में जुड़वां भाइयों की 99.99 परसेंटाइल्स आई:दोनों ने कोटा आने की जिद की थी; बच्चों की पढ़ाई के लिए मां ने डॉक्टरी छोड़ दी थी

जेईई मेंन जनवरी सेशन का रिजल्ट सोमवार शाम को जारी कर दिया गया। परीक्षा का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा किया गया। परिणामों में कोचिंग हब कोटा के विद्यार्थियों ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया है। सात छात्रों ने 100 परसेंटाइल्स अंक हासिल कर सफलता का परचम लहराया है। भुवनेश्वर ओड़िसा से कोटा आकर तैयारी कर रहे जुड़वा भाइयों ने 99.99 परसेंटाइल्स हासिल कर सबका ध्यान आकर्षित किया है। दोनों भाई पिछले तीन साल से कोटा में रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। मां ने बच्चों की पढ़ाई के के लिए अपनी डॉक्टरी की जॉब छोड़ दी। महरुफ अहमद खान ने खुशी जाहिर करते हुए बताया, मैंने 99.99 परसेंटाइल्स हासिल किया है और मेरे भाई का स्कोर भी बिल्कुल समान है। कोचिंग के दौरान जब हम टेस्ट देते थे तो कभी मेरे ज्यादा अंक आते थे तो कभी भाई के, लेकिन आज के रिजल्ट में हमारा प्रतिशत स्कोर एक जैसा है। वहीं मशरूर अहमद खान ने कहा हम 10वीं क्लास से ही कोटा में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। हमने हमेशा एक-दूसरे को मोटिवेट किया। जब भी किसी के कम अंक आते थे, दूसरा उसे संभालता और आगे बेहतर करने के लिए प्रेरित करता था। हमें आज लगातार मेहनत का परिणाम मिला है। दोनों भाइयों की कहानी सिर्फ अंकों तक सीमित नहीं है। परिवार के अनुसार, दोनों की पढ़ाई का तरीका भी अनोखा रहा है। वे अक्सर एक ही किताब से साथ बैठकर पढ़ाई करते हैं। यहां तक कि दोनों के चश्मे का नंबर, जूतों का साइज और दिनचर्या तक लगभग समान है। एक ही किताब से पढ़ते थे छात्रों की मां डॉक्टर जीनत बेगम ने बताया, मेरे दोनों बच्चे बचपन से ही पढ़ाई में बहुत होशियार रहे हैं। पहली कक्षा से ही उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। बच्चों की इच्छा थी कि वे इंजीनियर बनें, इसलिए हमने कभी उन पर कोई दबाव नहीं डाला। उनकी पसंद को ही प्राथमिकता दी। कोटा आने की जिद की थी मेरे दोनों बच्चों ने जब ओलंपियाड के बारे में पता किया और सोशल मीडिया पर देखा तो उन्होंने कहा कि हम भी ओलंपियाड में गोल्ड मेडल लेंगे। गोल्ड मेडलिस्ट जो कोटा के थे इसलिए इन दोनों बच्चों ने कोटा आने की जिद की और यहीं पर कोचिंग कर पढ़ाई करने को कहा। तब से मैं साथ में ही रही। कोटा में बेहतर पढ़ाई का माहौल उन्होंने कहा मैं उड़ीसा में गायनोलॉजिक डॉक्टर के रूप में कार्यरत थी, लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए मैंने अपनी नौकरी छोड़ दी और कोटा आ गई। हमारे लिए बच्चों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण था। यहां बेहतर कोचिंग और पढ़ाई का माहौल मिलने से हमने कोटा में ही रहकर तैयारी करने का निर्णय लिया। दोनों भाइयों ने अपनी सफलता का श्रेय कड़ी मेहनत, अनुशासन और कोचिंग संस्थान के मार्गदर्शन को दिया है। उनका लक्ष्य अब आईआईटी जैसे देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करना है।

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