प्रदेश में करीब सभी गांव साफ सफाई वाले हो गए हैं। कम से कम सरकारी आंकड़ों से यही नजर आ रहा है। संसद में दी जानकारी के अनुसार राजस्थान के 43463 गांवों में से 42792 गांव अब ओडीएफ प्लस बन चुके हैं। इनमें से 42515 गांव तो ओडीएफ प्लस के साथ ” मॉडल’ बनाए जा चुके हैं। जहां अपशिष्ट प्रबंधन भी किया जाने लगा है। प्रदेश पूर्ण रूप से ओडीएफ प्लस बनने वाला है। कुल 43463 गांवों में से अब केवल 671 गांव ही ऐसे बचे हैं जिन्हें इस श्रेणी में आना बाकी है। साल 2022 की शुरुआत में जहां अधिकांश जिलों में ओडीएफ प्लस गांवों की संख्या दहाई में नहीं थी। मगर अब सभी जिलों की उल्लेखनीय प्रगति दर्शायी गई है। अलवर जिले में 1 अप्रैल 2022 को केवल 9 गांव ओडीएफ प्लस थे, जो आज बढ़कर 1067 हो चुके हैं। बाड़मेर में आंकड़ा 60 गांवों से 1714 गांवों तक पहुंच गया। जबकि जैसलमेर व सिरोही जिलों की उपलब्धि शत-प्रतिशत बताई गई है। जैसलमेर के सभी 688 गांव और सिरोही के सभी 466 गांव अब पूरी तरह ओडीएफ प्लस हैं। राजसमंद जिले में सिर्फ एक गांव शेष है। यहां के 1053 में से 1052 गांव ओडीएफ प्लस का लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। इसी तरह डूंगरपुर के 975 में से 971 और बांसवाड़ा के 1497 में से 1442 गांवों को गंदगी मुक्त दिखाया गया है। इसी तरह जयपुर के कुल 1879 गांवों में से 1844 गांव ओडीएफ प्लस हो चुके हैं। उदयपुर में 1878 गांवों में से 1856 गांव और जोधपुर के 1188 में से 1160 गांव ओडीएफ प्लस घोषित किए जा चुके हैं। श्रीगंगानगर में 2809 गांवों में से 2776, हनुमानगढ़ में 1814 में से 1799 गांव, सीकर में 1185 और झुंझुनूं में 969 गांव ओडीएफ प्लस घोषित किए जा चुके हैं। कोटा में 776 और बूंदी में 863 गांव, भरतपुर में 752 और धौलपुर में 791 गांव भी साफ सफाई वाले बताए गए हैं। नवगठित जिलों में डीडवाना-कुचामन जिले में 784 में से 767 गांव, फलोदी में 729 में से 725 गांव और बालोतरा में 912 में से 908 गांव ओडीएफ प्लस हो चुके हैं। कोटपूतली-बहरोड़ में 535, डीग में 656 और खैरथल-तिजारा 547 गांव इस श्रेणी में है।


